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जिंदल के बिजलीघर को केंद्र का झटका

जिंदल के बिजलीघर को केंद्र का झटका

रायपुर. 20 जून 2010 (छत्तीसगढ़|विशेष संवाददाता)


देश के पर्यावरण एवं वन मंत्रालय ने जिंदल को तगड़ा झटका देते हुए उसके रायगढ़ के तमनार में बिजलीघर की योजना को खारिज कर दिया है. मंत्रालय ने छत्तीसगढ़ सरकार से कहा है कि वह पर्यावरण के नियम तोडऩे के लिए जिंदल के खिलाफ मुकदमा दर्ज करे.

jindal


छत्तीसगढ़ के सबसे बड़े निजी उद्योगपति और कांग्रेस के सांसद नवीन जिंदल की कंपनी को केन्द्र सरकार की ओर से यह तगड़ा झटका माना जा रहा है. रायगढ़ के जन चेतना नाम के सामाजिक संगठन की शिकायत पर केन्द्र सरकार ने एक टीम बनाकर तमनार में जांच करवाई थी और उसकी रिपोर्ट के आधार पर यह कार्रवाई की गई है.

जन चेतना संगठन के रमेश अग्रवाल ने इस बात पर खुशी जाहिर करते हुए कहा है कि भारत के औद्योगिक इतिहास में पहली बार केन्द्र सरकार ने ऐसी साहसी कार्रवाई की है और इससे तमनार के आदिवासियों को इंसाफ मिल सकेगा.

18 जून 2010 को केंद्रीय वन एवं पर्यावरण मंत्रालय ने जिंदल पॉवर लिमि. के डायरेक्टर को सूचित किया है कि उनके द्वारा 24 सौ मेगावाट का प्रस्तावित कोयला आधारित ताप बिजली घर का प्रस्ताव मंत्रालय ने अस्वीकार कर दिया है. केंद्र सरकार ने एक दूसरे पत्र में प्रदेश के आवास एवं पर्यावरण सचिव को लिखा है कि जिंदल द्वारा पर्यावरण स्वीकृति प्राप्त किए बिना पॉवर प्लांट का काम शुरू करना वन संरक्षण अधिनियम के नियमों के खिलाफ है. अधिनियम की धारा 19 के तहत जिंदल के खिलाफ केस दर्ज किया जाए.

31 मार्च 2009 को केंद्रीय वन एवं पर्यावरण मंत्रालय ने जिंदल के इस बिजली घर के लिए सैद्धांतिक स्वीकृति देते हुए, जिंदल के आवेदन पर विचार करते हुए टीओआर निर्धारित किए थे. जिनके मुताबिक जिंदल को अपनी पर्यावरण अध्ययन रिपोर्ट तैयार कर प्रथम जनसुनवाई करवानी थी.

इसी बीच बिना स्वीकृति प्राप्त हुए जिंदल द्वारा बिजली घर के निर्माण का कार्य शुरू कर दिया गया. पर्यावरण के लिए काम करने वाली संस्था जनचेतना ने भी जिंदल घराने के गैरकानूनी कार्यों की शिकायत केंद्रीय पर्यावरण मंत्री जयराम रमेश से की थी. शिकायत पर कार्रवाई कर केंद्रीय मंत्रालय ने एक दो सदस्यीय जांच चल रायगढ़ भेजा, जिन्होंने 22 मई 2010 को तमनार परियोजना स्थल का निरीक्षण किया और पाया कि जिंदल ने प्रस्तावित 24 सौ मेगावॉट के पॉवर प्लांट के लिए 62 हेक्टेयर पर काम शुरू भी कर दिया था. इसके पहले जिंदल को एक हजार मेगावाट के प्लांट के लिए मंत्रालय ने स्वीकृति 8 जून 2006 को दी थी.

मंत्रालय ने लिखा है कि 31 मार्च 2009 को जारी किए गए सत्र में 24 सौ मेगावाट के लिए 1041 हेक्टेयर भूमि की आवश्यकता बताई गई थी, जिसमें से 491 हेक्टेयर राखड़ बांध के लिए, 2 हेक्टेयर जलाशय और 100 हेक्टेयर कॉलोनी के लिए बताई गई थी. केंद्रीय पर्यावरण मंत्रालय ने नोट किया कि 62 हेक्टेयर भूमि में इतना बड़ा प्लांट लगाया जाना संभव नहीं है. इस बात को भी गंभीरता से लिया कि जिंदल द्वारा 24 सौ मेगावाट के पॉवर प्लांट का स्थान बदली किए जाने की जानकारी भी मंत्रालय को नहीं दी गई. इसमें पर्यावरण मंत्रालय ने आपत्ति दर्ज की है.

मंत्रालय ने पाया कि 24 सौ मेगावॉट प्लांट की योजना प्री-मेच्योर है. ऐसा कोई स्थान नहीं है, जहां इतना बड़ा प्लांट लगाया जा सके. इन तथ्यों के प्रकाश में मंत्रालय ने 31 मार्च 2009 को 24 सौ मेगावॉट के लिए जारी किए गए दिशा निर्देशों को वापस लेते हुए जिंदल को पुन: नया आवेदन जमा करने के लिए कहा है. इस तरीके से प्रस्ताव को रद्द किए जाने से 8 मई 2010 को हुई जन सुनवाई स्वमेव निरस्त हो जाती है. उसका कोई औचित्य नहीं रह जाता.

छत्तीसगढ़ शासन के पर्यावरण विभाग के प्रमुख सचिव बैजेन्द्र कुमार ने इस बारे में कहा कि 18 जून के भारत सरकार के ये पत्र राज्य शासन को अब तक नहीं मिले हैं, इसलिए वे इस बारे में अभी कुछ नहीं कह सकते, लेकिन राज्य शासन ने पहले ही जिंदल के इस बिजलीघर का निर्माण कार्य रोक दिया था क्योंकि वह पर्यावरण की मंजूरी के बिना बनाया जा रहा था. उन्होंने कहा कि इसके लिए हुई जनसुनवाई में बड़ी संख्या में आपत्तियां आई थीं. उन्हें दो बैग में भरकर केन्द्र सरकार को भेज दिया गया है. अभी वे आपत्तियां वहां पहुंची नहीं होंगी.

उन्होंने कहा कि केन्द्र सरकार ने जिंदल के निर्माणाधीन बिजलीघर की जांच करने के लिए एक टीम भेजी थी जिसके साथ राज्य शासन के अधिकारी भी गए थे. उसकी रिपोर्ट केन्द्र से अभी मिली नहीं है. बैजेन्द्र कुमार ने कहा कि पर्यावरण नियम तोडऩे वाले बहुत से और उद्योगों, खदानों के खिलाफ भी राज्य शासन ने कार्रवाई की है.

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इस समाचार / लेख पर पाठकों की प्रतिक्रियाएँ

 
 

bhagat singh raipur c.g.ramrsh

 
 रमेश अग्रवाल, राजेश त्रिपाठी और छत्तीसगढ़ को बहुत बधाई. रायगढ़ में जिस तरह से जनचेतना मंच कानूनी और मैदानी लड़ाई लड़ रहा हैं वो पूरे राज्य के लिए मिसाल हैं. जयराम रमेश जो पर्यावरण मंत्री हैं उनको भी श्रेया जाता हैं क्योकि जिंदल जैसे भरी भरकम सांसद के खिलाफ कांग्रेस सरकार में ये हिम्मत वही दिखा सकते हैं. तुमनार के उन संघर्षशील साथियों की हिम्मत और बहादुरी को भी आदर.

अभी तो ये शुरुआत है अब जिंदल के वार का इंतजार करना होगा, दस हजार करोड़ का प्रोजेक्ट आसानी से वो नहीं जाने देगा. एक बार रमेश अग्रवाल जी को पुनः बधाई.
 
   

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