पहला पन्ना प्रतिक्रिया   Font Download   हमसे जुड़ें RSS Contact
larger
smaller
reset

इस अंक में

 

क्यों बढ़ रहा भूख का आंकड़ा

हमारे कुलभूषण को छोड़ दो

भारत व अमेरिका में केमिकल लोचा

सवाल विकास की समझ का

प्रतिरोध के वक्ती सवालों से अलग

गरीबी उन्मूलन के नाम पर मज़ाक

जनमत की बात करिये सरकार

नेपाल पर भारत की चुप्पी

लोहिया काल यानी संसद का स्वर्णिम काल

स्मार्ट विलेज कब स्मार्ट बनेंगे

पाकिस्तान आंदोलन पर नई रोशनी

नर्मदा आंदोलन का मतलब

क्यों बढ़ रहा भूख का आंकड़ा

हमारे कुलभूषण को छोड़ दो

भारत व अमेरिका में केमिकल लोचा

युद्ध के विरुद्ध

किसके साथ किसका विकास

क्या बदल रहा है हिन्दू धर्म का चेहरा?

मोदी, अमेरिका और खेती के सवाल

 
 पहला पन्ना > खेल Print | Send to Friend | Share This 

प्रसिद्ध पहलवान चंदगी राम का निधन

प्रसिद्ध पहलवान चंदगी राम का निधन

नई दिल्ली. 29 जून 2010

भारत के प्रसिद्ध पहलवान चंदगी राम का निधन हो गया है. 1960 एवं 1970 के दशकों में उनकी पहलवानी की चर्चा जोरों पर थी. उन्हें "हिन्द केसरी", "भारत केसरी" समेत कई पुरस्कार मिले थे. भारत सरकार ने उन्हें अर्जुन पुरस्कार और पद्मश्री से भी सम्मानित किया था. ईरान के विश्व चैम्पियन अबुफजी को हराकर बैंकाक एशियाई खेलों में स्वर्ण पदक जीतना उनका सर्वश्रेष्ठ अंतरराष्ट्रीय प्रदर्शन माना जाता है.

हरियाणा के जिला हिसार के सिसाई गांव में 9 नवंबर, 1937 में जन्मे चंदगीराम शुरू में कुछ समय के लिए भारतीय सेना की जाट रेजीमेंट में सिपाही रहे और बाद में स्कूल टीचर होने के कारण उनको 'मास्टर चंदगीराम' भी कहा जाने लगा था. सत्तर के दशक के सर्वश्रेष्ठ पहलवान मास्टर जी को 1969 में अर्जुन पुरस्कार और 1971 में पदमश्री अवार्ड से नवाजा गया.

बीस साल की उम्र के बाद कुश्ती में हाथ आजमाना शुरू करने वाले मास्टर जी ने 1961 में राष्ट्रीय चैम्पियन बनने के बाद से देश का ऐसा कोई कुश्ती का खिताब नहीं रहा जो नहीं जीता हो. इसमें राष्ट्रीय प्रतियोगिताओं के अलावा हिंद केसरी, भारत केसरी, भारत भीम और रूस्तम-ए-हिंद आदि के खिताब शामिल हैं.

सभी प्रतिक्रियाएँ पढ़ें
 

इस समाचार / लेख पर पाठकों की प्रतिक्रियाएँ

 
 

kulishindian (kulishindian@gmail.com) Bikaner

 
 सर्वप्रथम मास्टरजी को मेरा श्रद्धा भरा प्रणाम. ईश्वर से प्राथना है कि वे पहलवान जी की आत्मा को अपनी शरण में स्थान दें. देश की सेवा सैनिक व अध्यापक के रूप में करके उन्होंने अपना जीवन धन्य किया और हमे देश सेवा का पथ दिखाया. पहलवान के रूप में खेल भावना के साथ विजयी होकर पुरस्कारों से देश दी झोली भरकर सपूत का धर्म निभाया. पुनश्च आदरणीय श्री चंदगीराम को मेरा श्रद्धा भरा प्रणाम. जय हिंद, जय श्री कृष्ण. 
   

इस समाचार / लेख पर अपनी प्रतिक्रिया हमें प्रेषित करें

  ई-मेल ई-मेल अन्य विजिटर्स को दिखाई दे । ना दिखाई दे ।
  नाम       स्थान   
  प्रतिक्रिया
   

 
  ▪ हमारे बारे में   ▪ विज्ञापन   |  ▪ उपयोग की शर्तें
2009-10 Raviwar Media Pvt. Ltd., INDIA. feedback@raviwar.com  Powered by Medialab.in