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माओवादी नेता आज़ाद के साथ मारा गया पत्रकार

माओवादी नेता आज़ाद के साथ मारा गया पत्रकार

नई दिल्ली. 4 जुलाई 2010


शनिवार को एक अहम रहस्योद्घाटन में यह बात सामने आई है कि शुक्रवार को आदिलाबाद के जंगलों में पुलिस द्वारा कथित मुठभेड़ में सीपीआई माओवादी के प्रवक्‍ता आजाद के साथा मारा गया दूसरा व्‍यक्ति दिल्‍ली स्थित हिंदी का एक स्‍वतंत्र पत्रकार है.

यहां प्रेस क्‍लब में पत्रकारों द्वारा की गई एक प्रेस कॉन्‍फ्रेंस में मारे गए पत्रकार हेम चंद्र पांडे की पत्‍नी बबिता ने बताया कि वह नई दुनिया, राष्ट्रीय सहारा और दैनिक जागरण जैसे अखबारों के लिए स्वतंत्र रुप से लिखा करते थे. बबिता ने कहा, “ वह पत्रकारिता में अपना करियर बनाना चाहते थे. मैं उन्‍हें मारने वालों को छोड़ूंगी नहीं. उन पर केस करूंगी.”

गौरतलब है कि शुक्रवार को पुलिस ने कहा था कि आजाद समेत उनके एक सहयोगी सहदेव को उसने आंध्र प्रदेश के जंगलों में एक मुठभेड़ में मार गिराया है. इस खबर के बाद सीपीआई (माओवादी) ने बयान जारी कर कहा कि यह मुठभेड़ फर्जी थी और आजाद को नागपुर से पुलिस ने उठाया था और बाद में कहीं ले जाकर उनकी हत्‍या कर दी.

बबिता के मुताबिक, वह अपने पति हेम चंद्र पांडे से 30 जून तक संपर्क में थीं. वह किसी खबर के सिलसिले में नागपुर गए हुए थे. 30 जून के बाद उनसे संपर्क टूट गया और अखबारों में शनिवार को मुठभेड़ की खबर के साथ प्रकाशित तस्‍वीरों से ही उन्‍हें अपने पति के मारे जाने की सूचना मिली.

हेम चंद्र पांडे और बबिता उत्‍तराखंड के पिथौरागढ़ जिले के रहने वाले हैं. कॉन्‍फ्रेंस में मौजूद नैनीताल समाचार के संपादक राजीव लोचन शर्मा के मुताबिक बबिता ने पांच साल तक उनके अखबार में काम किया है. उनका समूचा परिवार पत्रकारिता से जुड़ा रहा है.

कॉन्‍फ्रेंस में मौजूद बीडी शर्मा, बनवारीलाल शर्मा और जीएन साई बाबा ने घटना की निंदा करते हुए बबिता की जान की सुरक्षा करने की मांग की है. कॉन्‍फ्रेंस में बताया गया कि हेम चंद्र पांडे हेमंत पांडे के नाम से लिखा करते थे. वह छात्र जीवन में आइसा की राजनीति से जुड़े थे.


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