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नक्सली हिंसा में हर दिन 4 लोगों की मौत

नक्सली हिंसा में हर दिन 4 लोगों की मौत

रायपुर. 7 जुलाई 2010


देश में सुरक्षा बलों का दबाव बढ़ने के साथ ही नक्सली हिंसा में लगातार बढ़ोत्तरी हुई है. पिछले पांच सालों में नक्सली हिंसा में जितने लोग वर्षवार मारे गये हैं, इस साल जून तक नक्सली हिंसा में मारे जाने वालों का आंकड़ा उस के आस पास पहुंच गया है. हिंसक गतिविधियों में सर्वाधिक बढ़ोत्तरी पश्चिम बंगाल और छत्तीसगढ़ में देखी गयी है. पिछले 6 महीनों में नक्सली हिंसा में 710 लोग मारे गये हैं. इस तरह इन 6 महीनों में हर दिन लगभग 4 लोगों को अपनी जान गंवानी पड़ी है.


नक्सली वारदात में 2005 से 2009 तक के पांच सालों में नक्सली हिंसा में कुल 3744 लोगों को अपनी जान गंवानी पड़ी है. इन पांच सालों में अकेले छत्तीसगढ़ में नक्सली हिंसा में मरने वालों की संख्या 1348 है. इस साल जून तक के आंकड़े जोड़ लिये जायें तो 2005 से अब तक कुल 4454 लोगों को इस हिंसा में अपनी जान गंवानी पड़ी है.

इस साल जनवरी से जून तक नक्सली गतिविधियों में 389 आम नागरिक और 177 सुरक्षा बल के जवान मारे गये. इस दौरान मारे जाने वाले नक्सलियों की संख्या 144 है. इस तरह इन 6 महीनों में कुल 710 लोग मारे गये हैं. छत्तीसगढ़ में यह आंकड़ा 222 है और पश्चिम बंगाल में 305. छत्तीसगढ़ में जनवरी से जून तक 53 आम नागरिक, 107 सुरक्षा बल के जवान और 12 नक्सली मारे गये हैं. पश्चिम बंगाल में इन 6 महीनों में 234 आम नागरिक, 33 सुरक्षा जवान और 38 नक्सली मारे गये हैं.

पिछले साल नक्सली वारदात में 997 लोग मारे गये. इसमें 391 आम नागरिक, 312 पुलिसकर्मी और 294 नक्सली शामिल हैं. 2009 में छत्तीसगढ़ में 87 आम नागरिक, 121 पुलिसकर्मी और 137 नक्सली मारे गये हैं. पश्चिम बंगाल में 134 आम नागरिक, 15 सुरक्षाकर्मी और 9 नक्सली मारे गये. पिछले साल झारखंड में 74 आमजन, 67 पुलिस बल के जवान और 76 नक्सली मारे गये थे.

आंकड़ों में देखें तो 2005 से नक्सल प्रभावित इलाकों में मौत के आंकड़े गहराते चले गये हैं. हालांकि 2008 तक ये आंकड़े 2005 के आंकड़ों के आसपास ही रहे. 2005 में नक्सल वारदात में 717, 2006 में 742, 2007 में 650 और 2008 में 638 लोग मारे गये. लेकिन 2009 में यह आंकड़ा 997 तक पहुंच गया.

2005 से 2009 तक के 5 सालों में नक्सली गतिविधियों में 1388 आम नागरिक मारे गये. इसी दौरान 1022 पुलिस जवान नक्सली हिंसा में मारे गये. हालांकि इन पांच सालों में 1334 नक्सलियों को भी मारने में पुलिस को सफलता मिली. इस तरह इन पांच सालों में कुल 3744 लोगों को नक्सली हिंसा में अफनी जान गंवानी पड़ी है.


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