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माओवादियों के निशाने पर शहर

वॉशिंगटन. 9 जुलाई 2010

सामरिक, आर्थिक, सैन्य और राजनीतिक मुद्दों का विश्लेषण करने वाली अमरीकी विश्लेषक फर्म स्ट्रैटफोर ने चेतावनी दी है कि नक्सली निकट भविष्य में भारत के शहरी क्षेत्रों को निशाना बनाने की क्षमता विकसित कर सकते हैं. भारत में नक्सलवाद का विश्लेषण करती एक रिपोर्ट में स्ट्रैटफोर ने भारतीय सुरक्षा बलों को ये चेताया है कि उन्हें नक्सली गतिविधियों पर कड़ी नज़र रखनी चाहिए जिससे वे इस तरह की क्षमता विकसित न कर पाएं. इस विश्लेषण में कहा गया है कि नक्सली सरकारों को सिर्फ हिंसक वारदातों से ही तंग करने की क्षमता रखते हैं बल्कि वे सामाजिक विसंगतियों और राजनीतिक नीतियों का इस्तेमाल कर अपना हित साध सकते हैं.

नक्सल हिंसा

रिपोर्ट के अनुसार पिछले कुछ महीनों में नक्सलियों द्वारा लगातार आईडी का प्रयोग, मज़बूत और फुर्तीले खूफिया नेटवर्क तथा सशस्त्र छापेमार कार्रवाई करने की क्षमता बता रही है कि नक्सली लगातार अपनी क्षमताओं का विकास कर रहे हैं. हालांकि रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि नक्सलियों ने अभी तक रेड कॉरिडोर के बाहर कोई हिंसक कार्रवाई नहीं की है जिससे शहरी क्षेत्रों में उनकी मारक क्षमता का पता नहीं चला है. अपने विश्लेषण में स्ट्रैटफोर ने नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में सेना के इस्तेमाल के खिलाफ चेताया है और कहा है कि इससे केंद्रीय बलों को कड़े विरोध का सामना करना पड़ सकता है और इसके निकट भविष्य में शुरु होने की कोई संभावना नहीं दिखती है.

रिपोर्ट के अनुसार नक्सलियों के प्रति स्थानीय लोगों की संवेदना, उसकी फुर्ती, स्वतंत्र रूप से मार करने की क्षमता, विकसित खुफिया तंत्र नक्सल तंत्र को अपेक्षाकृत सुस्त और आपसी तालमेल की कमी से जूझ रहे सीआरपीएफ जैसे केंद्रीय सुरक्षा बलों से ज्यादा मारक बनाता है.


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