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बिना मंजूरी बिजलीघर, जिंदल के खिलाफ मुकदमा

बिना मंजूरी बिजलीघर, जिंदल के खिलाफ मुकदमा

रायपुर. (छत्तीसगढ़) 17 जुलाई 2010

पर्यावरण स्वीकृति के बगैर बिजली घर का निर्माण कार्य शुरू करने पर पर्यावरण संरक्षण मंडल ने जिंदल पॉवर लिमिटेड के खिलाफ न्यायालय में वाद दायर किया है. केंद्रीय पर्यावरण मंत्रालय ने सरकार को चिट्ठी लिखकर जिंदल पॉवर के खिलाफ कानूनी कार्रवाई करने के निर्देश दिए थे.

रायगढ़ जिले के तमनार ब्लाक में जिंदल पॉवर लिमिटेड द्वारा 24 सौ मेगावाट का बिजली घर प्रस्तावित है. यहां पर्यावरण स्वीकृति के बगैर कंपनी ने निर्माण कार्य शुरू कर दिया था. प्रदूषण निवारण तथा नियंत्रण अधिनियम 1981 की धारा 21 के अनुसार कोई भी व्यक्ति मंडल की अनुमति के बिना वायु प्रदूषण नियंत्रण क्षेत्र में न औद्योगिक संयंत्र स्थापित कर सकता है और न ही उत्पादन कार्य शुरू कर सकता है. मंडल के अधिकारियों ने 26 फरवरी को पत्र लिखकर पर्यावरण स्वीकृति के बगैर जिंदल पॉवर लिमिटेड द्वारा निर्माण कार्य शुरू करने पर आपत्ति की थी और निर्माण कार्य रोकने के लिए पत्र भी लिखा था.

इस पूरे मामले को लेकर जन चेतना संगठन के प्रमुख रमेश अग्रवाल ने केंद्रीय पर्यावरण मंत्रालय से इसकी शिकायत की थी. इस पर केंद्रीय पर्यावरण मंत्रालय के दो अधिकारियों ने निर्माण स्थल का निरीक्षण किया था. इसके बाद केंद्रीय पर्यावरण मंत्रालय ने पर्यावरण सचिव को पत्र भेजकर जिंदल समूह के खिलाफ कानूनी कार्रवाई करने के निर्देश दिए थे.

क्षेत्रीय पर्यावरण अधिकारी ए.सी. मालू ने जिंदल पॉवर लिमिटेड और पी.के. चक्रवर्ती ईडी के खिलाफ न्यायालय में 7 जुलाई को वाद प्रस्तुत किया है. क्षेत्रीय पर्यावरण अधिकारी ने न्यायालय से आग्रह किया है कि आरोपियों को उनके अवैधानिक कृत्य के लिए पर्यावरण संरक्षण अधिनियम की धारा 15, 16 जल (प्रदूषण निवारण तथा नियंत्रण) अधिनियम की धारा 44, 47 और वायु अधिनियम की धारा 37, 40 के तहत दंडित किया जाए.

रायगढ़ जिले में कुछ और कंपनियों द्वारा पर्यावरण नियमों को अनदेखा कर निर्माण कार्य करने का मामला प्रकाश में आया है. इस पर पर्यावरण संरक्षण मंडल ने निको पॉवर, रायगढ़ कोल के खिलाफ भी न्यायालय में वाद दायर किया है. सारडा एनर्जी के खिलाफ भी कुछ माह पहले वाद दायर किया गया था.

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इस समाचार / लेख पर पाठकों की प्रतिक्रियाएँ

 
 

bhagat singh raipur cg

 
 यही तो कमाल है. रमेश अग्रवाल, राजेश त्रिपाठी, हरिहर पटेल के खिलाफ दो दो केस में फिर और जिंदल के खिलाफ कोर्ट में केस. जिंदल गलत पेपर के आधार पर 10 हजार 600 करोड़ रुपये का लोन सभी से पास करा ले. बिना लाइसेंस के बिजली बेचे. बिना पर्यावरण मंजूरी के 65 एकड़ में निर्माण करा ले तो उसके खिलाफ मुकदमा, जिसके निर्णय की कोई सम्भावना नहीं और जो इन सब की पोल खोले उसे पुलिस की प्रताड़ना मिले. 
   

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