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प्रभाकरण हमारा दुश्मन नहीं था- चिदंबरम

प्रभाकरण हमारा दुश्मन नहीं था- चिदंबरम

विरुधनगर. 19 जुलाई 2010


भारत के गृहमंत्री पी चिदंबरम ने कहा है कि प्रभाकरण हमारा दुश्मन नहीं था लेकिन उसने जो रास्ता चुना था, हम उसके खिलाफ थे. लिट्टे समर्थक एमडीएमके प्रमुख वाइको के संसदीय क्षेत्र विरुधनगर में एक सभा को संबोधित करते हुये चिदंबरम ने रहस्योद्घाटन किया कि उन्होंने प्रभाकरण से मुलाकात की थी और घंटो उससे बात की थी.

चिदंबरम ने सभा को संबोधित करते हुए कहा कि प्रभाकरण ने अगर 1987 के भारत-श्रीलंका समझौते को मान लिया होता तो वह श्रीलंका के उत्तरी और पूर्वी राज्यों का बेताज बादशाह होता.

उन्होंने कहा कि श्रीलंका में लिट्टे के खिलाफ युद्ध के दौरान काफी नुकसान हुआ है. किसी भी देश का निर्माण शांति से होता है. संघर्षपूर्ण स्थिति सो कई हल नहीं निकलता. श्रीलंका इसका बड़ा उदाहरण है.

गृहमंत्री ने दावा किया कि विस्थापित तमिलों के पुनर्वास के लिये भारत सरकार ने श्रीलंका को 3600 करोड़ रुपये की सहायता राशि दी है. इसके अलावा उत्तरी श्रीलंका में 50 हज़ार गृह निर्माण पर भी भारत ने एक हजार करोड़ रुपये दिये हैं. चिदंबरम ने उम्मीद जताई कि आने वाले दो सालों में श्रीलंका में शांति की स्थिति कायम हो जायेगी.


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