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माओवादियों के खिलाफ कार्रवाई बंद हो-ममता

माओवादियों के खिलाफ कार्रवाई बंद हो-ममता

लालगढ़. 9 अगस्त 2010


तृणमूल नेता और रेल मंत्री ममता बनर्जी ने केंद्र सरकार से माओवादियों के ख़िलाफ़ अभियान बंद करने और शांतिपूर्ण तरीके से बातचीत करने को कहा है. उन्होंने कहा कि सरकार को आदिवासियों के दमन से बचना चाहिये.

लालगढ़ में आयोजित एक रैली में बोलते हुए उन्होंने कहा कि माओवादियों और सरकार के बीच आज से ही शांति प्रक्रिया शुरू होनी चाहिए. बंगाल इस संबंध में पूरे भारत को रास्ता दिखा सकता है. हिंसा और हत्याएँ बंद होनी चाहिए. यदि आपको मुझसे कोई समस्या है तो मेधा पाटकर और स्वामी अग्निवेश जैसे लोग पहल कर सकते हैं. लेकिन बातचीत शुरू होनी चाहिए.

ममता बनर्जी ने कहा कि जंगलमहल के विकास के लिए जो भी आवश्यक होगा, वो मैं करूंगी. यदि ज़रूरी हुआ तो मैं यहाँ रेलवे फैक्ट्री स्थापित करने पर भी विचार किया जा सकता है.

उन्होंने कहा कि कि लालगढ़ में नक्सलवाद के ख़िलाफ़ लड़ाई के नाम पर राज्य सरकार ने स्वाभाविक लोकतांत्रिक प्रक्रिया को ख़त्म कर दिया है और यह रैली इसी के विरोध में है.

ज्ञात रहे कि इस रैली में ममता बनर्जी के साथ मंच पर मेधा पाटकर, स्वामी अग्निवेश, महाश्वेता देवी जैसे समाजसेवी और लेखक भी उपस्थित थे. मेधा पाटकर ने भी आरोप लगाया कि सरकार उद्योगपतियों के हित में काम कर रही है औऱ इसके लिये आदिवासियों को निशाना बनाया जा रहा है.

स्वामी अग्निवेश का कहना था कि सरकार को जो गंभीरता बातचीत के लिये दिखाना चाहिये, उसका अभाव नजर आता है. देश में अगर हिंसा रोकना है तो बातचीत के लिये आगे आना ही होगा.

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इस समाचार / लेख पर पाठकों की प्रतिक्रियाएँ

 
 

bhagat singh raipur cg

 
 ये बिलकुल गलत रिपोर्टिंग हैं. ममता जी ने अपनी सभा में नक्सली हिंसा और सरकारी हिंसा ख़त्म करने की मांग करके बातचीत का रास्ता शुरू करने की बात कही हैं.उन्होंने यही कहा है कि सरकार ने नक्सलवाद के नाम पर लोकतान्त्रिक प्रक्रिया को ख़त्म कर दिया हैं जो छत्तीसगढ़ में भी ऐसा ही हो रहा हैं. जब कोई दोनों पक्ष की हिंसा खतम करने की बात कहता हैं तब उसे नक्सली के साथ जोड़ देते हैं.

ये बात सही हैं कि वेस्ट बंगाल में लाल को ज्यादा लाल खत्म करने के लिए ममता के साथ खड़ा हैं, लेकिन भाई ममता की बात को सही तरीके से तो लिखा जाये.
 
   
 

sunder lohia (lohiasunder2 @gmail.com) Mandi ( H.P}.

 
 ममता दीदी के लिए पश्चिमी बंगाल के माओवादी छत्तीसगढ़ और झारखण्ड के माओवादियों से अलग हैं. वास्तव में सारे आदिवासियों की समस्या एक ही है की उनके यहाँ विकास के नाम पर लूट ही हुई है. ममता बंगाल में रेल फैक्ट्री खोले इससे बढ़िया और क्या हो सकता है. पर उसे झारखण्ड और छत्तीसगढ़ में भाजपा की सरकारों द्वारा आदिवासियों के प्राकृतिक संसाधनों का पूंजीपतियों के लाभ के लिए किये जा रहे शोषण का भी कुछ न कुछ प्रतिरोध करना चाहिए. उन लोगों के लिए भी केंद्रीय सरकार की तरफ से कोई तोहफा मिलाना चाहिए. नहीं तो बात आदिवासियों की बेहतरी के बजाये सीपीएम के विरोध तक सीमित हो कर अटक जाएगी. 
   

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