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नेशनल पॉपुलेशन रजिस्टर के साथ जाति गणना निरर्थक

नेशनल पॉपुलेशन रजिस्टर के साथ जाति गणना निरर्थक

नई दिल्ली. 12 अगस्त 2010


जनहित अभियान ने जाति गणना के केंद्र सरकार के प्रस्ताव को निरर्थक बताते हुए कहा है कि केंद्र सरकार का यह फैसला बेतुका है कि बायोमैट्रिक कार्ड बनवाने के लिए आने वालों से उनकी जाति पूछ ली जाएगी. यह बेहद भ्रामक प्रस्ताव है. इस तरह आंकड़ा जुटाने से जाति आधारित जनगणना से हासिल होने वाले ज्यादातर लक्ष्य पूरे नहीं हो पाएंगे.

अभियान की ओर से जारी विज्ञप्ति में कहा गया है कि जनगणना के फॉर्म में व्यक्ति की सामाजिक आर्थिक और शैक्षणिक स्थिति को समझने वाले कॉलम होते हैं. इन सूचनाओं के बगैर यूनिक आईडेंटी कार्ड बनाते समय एक अलग फॉर्म में जाति पूछ लेने भर से जाति और उनकी आर्थिक सामाजिक तथा शैक्षणिक स्थिति के अंतर्संबंधों को नहीं समझा जा सकता है.

जनहित अभियान ने आशंका जताई है कि इस तरह पूरी कवायद सिर्फ जाति की संख्या जानने तक सीमित हो जाएगी. इस तरह जाति का आंकड़ा इकट्ठा करने से जातियों औऱ जाति समूहों की आर्थिक, सामाजिक और शैक्षणिक स्थिति का तुलनात्मक अध्ययन नहीं हो पाएगा. जनगणना के समाजशास्त्रीय लक्ष्यों को हासिल करने के लिए जाति के प्रश्न को जनगणना के साथ ही पूछा जाना चाहिए.

जनहित अभियान ने सरकार के तरीके को अवैज्ञानिक बताते हुए कहा है कि नेशनल पॉपुलेशन रजिस्टर के लिए 15 साल से ज्यादा उम्र वालों की ही बायोमैट्रिक सूचना ली जाएगी. परिवार के बाकी लोगों के बारे में इन्हीं से पूछकर कॉलम भरने का समाधान गृह मंत्रालय दे रहा है. बायोमैट्रिक और नेशनल पॉपुलेशन रजिस्टर का काम अभी प्रायोगिक स्तर पर है. इससे लेकर विवाद भी बहुत हैं. इसलिए इसके साथ जाति की गणना जैसे महत्वपूर्ण कार्य को शामिल करना सही नहीं है.

अभियान ने आशंका जताई है कि आईडेंटी कार्ड बनाने वालों को जाति जनगणना का काम सौंपने का निर्णय पूरी कवायद को बर्बाद कर सकता है. अभियान की ओर से जारी विज्ञप्ति में कहा गया है कि जनगणना और जाति गणना का काम जनगणना विभाग ही कर सकता है. उसके पास इस काम के लिए संसाधन भी हैं और अनुभव भी. यूनिक आइडेंटी कार्ड विभाग के इसका अभाव है.


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