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सड़ाने के बजाये मुफ्त बांट दें अनाज

सड़ाने के बजाये मुफ्त बांट दें अनाज

नई दिल्ली. 12 अगस्त 2010


देश भर के गोदामों में सड़ रहे हजारों टन अनाज पर उच्चतम न्यायालय ने साफ कहा है कि सड़ने से तो अच्छा है कि सरकार इसे गरीब और भूखे लोगों में मुफ्त बंटवा दे. कोर्ट ने आश्चर्य जताते हुये कहा कि एक तरफ इतनी बड़ी तादाद में अनाज सड़ रहा है, वहीं लगभग 20 करोड़ लोग कुपोषण के शिकार हैं.

पीयूसीएल द्वारा दायर एक जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुये उच्चतम न्यायालय में जस्टिस दलवीर भंडारी व जस्टिस दीपक वर्मा की खंडपीठ ने कहा कि अनाज को भूखे लोगों तक पहुंचाइए, बजाय इसके कि वह नालियों में बहे.

खंडपीठ ने केंद्र सरकार से यह भी कहा है कि वह हर प्रदेश में एक बड़ा गोदाम बनाने की व्यवस्था सुनिश्चित करे और संभाग और जिले स्तर पर भी ऐसे गोदाम बनाये जायें.

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इस समाचार / लेख पर पाठकों की प्रतिक्रियाएँ

 
 

sunder lohia (lohiasunder2 @gmail.com) Mandi ( H.P}.

 
 माननीय न्यायालय की चिंता सही है. लेकिन सड़े हुए अनाज को गरीबों में बांटने से उनके स्वास्थ्य के साथ खिलवाड़ करने जैसा लगता है. माननीय न्यायालय सरकार को अनाज सड़ने से रोकने के लिए खाद्य निगम के लिए जगह जगह पर खाद्य भंडार बनाने की सिफारिश कर, जिनके आभाव में खाद्य सुरखा का प्रस्तावित बिल चूहों के लिए ही खाद्य सुरखा मुहैया करवाएगा. 
   

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