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पाक, अलगाववादी, माओवादी सरकार से बातचीत करें-मनमोहन

पाक, अलगाववादी, माओवादी सरकार से बातचीत करें-मनमोहन

नई दिल्ली. 15 अगस्त 2010


भारत के 64वें स्वतंत्रता दिवस पर प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने लाल किले से राष्ट्र को संबोधन में कहा कि भारत पड़ोसी देशों के साथ अमन चाहता है और बातचीत के जरिए सभी मसले हल करना चाहता है. उन्होंने कहा कि कश्मीर के अलगाववादी नेता भी बातचीत के लिये आगे आयें. प्रधानमंत्री ने माओवादियों से भी बातचीत की मेज पर आने का आह्वान किया.

प्रधानमंत्री ने कहा कि हम पड़ोसी देशों के साथ शांति चाहते हैं, जो भी मतभेद हैं, उन्हें बातचीत के जरिए सुलझाना चाहते हैं. जहाँ तक पाकिस्तान की बात है, हम उनसे उम्मीद करते हैं कि वो अपनी ज़मीन का इस्तेमाल हमारे ख़िलाफ़ दहशतगर्दी की गतिविधियों में नहीं होने देगा. हम पाकिस्तान सरकार के साथ अपनी बातचीत में भी इस बात पर जोर देते रहे हैं. अगर ऐसा नहीं होता तो बातचीत के सिलसिले को बहुत आगे तक नहीं बढ़ाया जा सकता.

प्रधानमंत्री ने स्वीकार किया कि आजादी के 63 साल बाद भी आदिवासियों का शोषण हुआ है और उन तक विकास का लाभ नहीं पहुँचा है.

मनमोहन सिंह ने नक्सलवादियों से अपील की है कि वे सरकार के साथ बातचीत करें. हर नागरिक की सुरक्षा की ज़िम्मेदारी सरकार की है और सरकार हिंसा से सख्ती से निबटेगी. मनमोहन सिंह ने कहा कि नक्सलवाद की चुनौती को केंद्र और राज्य को एकजुट होकर सामना करना होगा. क़ानून का राज कायम करने की ज़िम्मेदारी सरकार की है.

मनमोहन सिंह ने कहा कि सरकार जम्मू कश्मीर के हर उस व्यक्ति या गुट से बातचीत के लिए तैयार हैं जो हिंसा का रास्ता छोड़ दे. उन्होंने जम्मू कश्मीर और पूर्वोत्तर राज्यों में लोगों से लोकतांत्रिक व्यवस्था में रहकर काम करने की अपील की.

उन्होंने पेट्रोलियम पदार्थों की कीमतों में पिछले दिनों की गई वृद्धि को उचित ठहराते हुए कहा कि अंतरराष्ट्रीय बाजार में ईंधन की कीमतों पर वृद्धि हुई है और देश की अर्थव्यवस्था के लिए इसका बोझ उठाना मुश्किल है.

राष्ट्रमंडल के खेलों में भयावह भ्रष्टाचार के आरोप झेल रही सरकार का बचाव करते हुए मनमोहन सिंह ने कहा कि ये भारत के लिए गौरवपूर्ण अवसर है. उन्होंने यह भी कहा कि ये सभी देशवासियों के लिए एक राष्ट्रीय त्योहार है. उन्होंने कहा कि इसे सफल बनाने में कोई कसर नहीं छोड़ेंगे ताकि दुनिया को पता चल सके कि भारत आत्मविश्वास के साथ आगे बढ़ रहा है.

उन्होंने कहा कि 2004 में जब संयुक्त प्रगतिशील गठबंधन सरकार सत्ता में आई थी, तो देश में कृषि की हालत संतोषजनक नहीं थी.पिछले कुछ वर्षों में कृषि विकास की दर में वृद्धि हुई है, लेकिन हम लक्ष्य से अब भी दूर हैं. हमें और कड़ी मेहनत करने की आवश्यकता है, ताकि कृषि विकास की दर चार फीसदी तक पहुंचाई जा सके.

प्रधानमंत्री ने महंगाई के मुद्दे पर कहा कि मुझे पता है कि कीमतों का ग़रीब जनता पर सबसे ज्यादा असर पड़ा है. हम महंगाई को कम करने की हर मुमकिन कोशिश में लगे हैं. हमें पूरा भरोसा है कि हम जल्द ही इसमें सफल होंगे.


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