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संसद में गूंजा अलीगढ़ का किसान आंदोलन

संसद में गूंजा अलीगढ़ का किसान आंदोलन

नई दिल्ली. 17 अगस्त 2010


अलीगढ़ में किसानों के आंदोलन का मुद्दा संसद में भी गरमाया रहा. मंगलवार को समाजवादी पार्टी के नेता मुलायम सिंह यादव ने लोकसभा की कार्यवाही शुरू होते ही आंदोलन के दौरान पुलिस फायरिंग से किसानों की हुई मौत का मुद्दा उठाया. उन्होंने राज्य की मायावती सरकार पर किसान विरोध होने का आरोप लगाया. भाजपा के पूर्व अध्य क्ष और गाजियाबाद से सांसद राजनाथ सिंह ने भी यह मुद्दा उठाते हुए अलीगढ़ और मथुरा के आंदोलनरत किसानों पर गोलियां व लाठियां भांजने के लिए राज्य सरकार को आड़े हाथों लिया.

ज्ञात रहे कि अलीगढ़ और मथुरा से लगे हुए इलाके में बन रहे यमुना एक्सप्रेस वे के लिए सरकार किसानों की ज़मीनों का अधिग्रहण कर रही है. अलीगढ़ में शनिवार को अधिक मुआवजे की मांग कर रहे किसानों और पुलिस के बीच हुए संघर्ष में एक पुलिसकर्मी सहित दो लोगों की मौत हो गई थी और करीब एक दर्जन लोग घायल हो गए थे.

165 किलोमीटर लंबे आठ लेन वाले इस एक्सप्रेस-वे को बनाने का ठेका जेपी इंडस्ट्रीज़ को दिया गया है. किसानों का आरोप है कि सरकार उनसे कम कीमत पर जमीन लेकर बिल्डरों को फायदा पहुंचा रही है. अलीगढ़ के 5 गावों के 300 किसानों की कुल 510 हेक्टेयर जमीन इस एक्सप्रेस-वे की भेंट चढ़ रही है. किसानों की मांग है कि उन्हें 8.5 लाख रुपये प्रति बीघा मिले, लेकिन सरकार उन्हें 3−4 लाख रुपये ही दे रही है. किसानों का कहना है कि उन्हों ग्रेटर नोयडा की तर्ज पर मुआवजा मिले, जहां किसानों को 8.5 लाख रुपये प्रति बीघा की दर से मुआवजा मिला है.

राज्यो की बसपा सरकार ने 570 रुपये प्रति वर्गमीटर की दर से मुआवजा देने की भी बात कही है. लेकिन किसानों का कहना है कि उन्हें 880 रुपये प्रति वर्गमीटर की दर से मुआवजा दिया जाए. किसानों का कहना है कि जब तक सरकार उनकी मांग नहीं मानती है, आंदोलन जारी रहेगा. दूसरी ओर, यूपी सरकार ने इस आंदोलन में मारे गए किसानों के घरवालों को दस-दस लाख रुपये की बढ़ी हुई सहायता राशि और घायलों को 2-2 लाख रुपये मदद के तौर पर देने का ऐलान किया है.

आज संसद में इस मुद्दे पर हंगामा होने के बाद प्रणव मुखर्जी ने कहा कि सरकार किसानों के साथ अन्याय नहीं होने देगी. उन्होंने माना कि राज्य सरकार की गलतियों के कारण अलीगढ का यह हाल हुआ है.

इधर किसानों का आंदोलन आज आगरा पहुंच गया. आगरा में भी आंदोलनकारी किसानों ने प्रशासन की गाड़ियों पर पथराव किया जिसमें आगरा के एसडीएम के घायल होने की खबर है. आगरा के नजदीक थाना एहतमादपुर के चौगान गांव में आज किसानों ने आंदोलन शुरु कर दिया. कल प्रशासन ने एहतियात के तौर पर चौगान गांव में पुलिस बल तैनात कर दिया था. जिस पर किसानों का गुस्सा भड़क गया और लोग सड़कों पर उतर आए.

उदर राज्य की मुख्यमंत्री मायावती ने मायावती ने कहा कि बीएसपी सरकार किसानों की जमीन का अधिग्रहण उचित मुआवजा देने के बाद ही करेगी. किसानों की जमीन के मुआवजे के बारे में अधिकारियों को किसानों के हित में ही फैसला करना चाहिए. सरकार किसानों की जमीन को सस्ती दरों पर लेकर उद्योगपतियों को मुनाफा नहीं कमाने देगी. मुख्यमंत्री ने किसानों की भूमि अधिग्रहण पर विपक्ष की राजनीति को दुर्भाग्यपूर्ण बताया. उन्होंने कहा कि एसपी को किसानों का हितैषी बनने से पहले दादरी में पावर प्लांट के लिए जबरन अधिगृहीत की गई हजारों एकड़ जमीन के मामले को याद कर लेना चाहिए. उन्होंने कहा कि दादरी के किसानों को बहुत संघर्ष करने पर कोर्ट के दखल से ही राहत मिल पाई.

मायावती ने कहा कि केंद्र सरकार ने एसईजेड के नाम पर जिस तरह से देशभर में किसानों की लाखों एकड़ जमीन को औने-पौने दाम में लेकर कौड़ियों के मोल उद्योगपतियों को दिया, उसकी मिसाल देश में मिलना असंभव है, लेकिन बीएसपी सरकार कभी भी किसानों के हितों की अनदेखी नहीं होने देगी. 2007 में सत्ता संभालने के बाद ही बीएसपी ने एक स्पष्ट भूमि अधिग्रहण नीति लागू की थी और सरकार उस पर कायम है.


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