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नत्था नहीं, हम सब मरेंगे

नत्था नहीं, हम सब मरेंगे

रांची. 21 अगस्त 2010


लगातार सूखे की मार झेल रहे झारखंड के बीस गांव के दो हज़ार से ज्यादा किसानों ने राष्ट्रपति से इच्छा मृत्यु की इज़ाजत मांगी है. अभी राज्य में राष्ट्रपति शासन है और किसानों ने राज्यपाल एमओएच फारुख को चिठ्ठी लिखकर अपनी इच्छा ज़ाहिर की है. इस आशय में इलाके के अधिकारियों का कहना है कि किसानों की ओर से सामूहिक इच्छामृत्यु की कोई अपील नहीं की गई है.

गौरतलब है कि पिछले दो सालों की तरह झारखंड में इस साल भी औसत से 42 प्रतिशत कम बारिश हुई है और राज्य के सभी 24 जिलों को सूखाग्रस्त घोषित कर दिया गया है. प्रशासन मान रहा है कि स्थिति बेहद खराब है लेकिन वो भी कोई ठोस मदद पहुँचाने में नाकामयाब रहा है. ऐसे में किसानों को मौसम और प्रशासन की दोहरी बेरुखी झेलनी पड़ रही है.

इस बीच शनिवार को एक केंद्रीय टीम ने पलामू जिले का दौरा किया. यह वही जिला है जहां किसानों ने सामूहिक इच्छा मृत्यु की मांग की है. इलाके के एसडीओ सुनील कुमार का कहना है कि इलाके में हालात बेहतर बनाने के लिए प्रशासन लगा हुआ है. इसके तहत किसानों को जरूरी चीजें मुहैया कराने के निर्देश दिए गए हैं.

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इस समाचार / लेख पर पाठकों की प्रतिक्रियाएँ

 
 

avinash rai (avinashkumarrai28@gmail.com) new delhi

 
 सरकार के द्वारा निर्देश तो जारी कर ही दिए जाते है परन्तु देखना यह है की उस पर अमल कितना होता है. इतिहास गवाह है की आज तक कोई भी सरकारी निर्देश पूरी तरह अमल में नहीं लाया जा सका है जिसमें आम आदमी का हितों का उल्लेख हो. 
   

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