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वेदांता के अनिल अग्रवाल हो सकते हैं सबसे अमीर

वेदांता के अनिल अग्रवाल हो सकते हैं सबसे अमीर

नई दिल्ली. 22 अगस्त 2010


एमनेस्टी समेत दुनिया भर के सामाजिक संगठनों का विरोध झेल रहे वेदांता समूह आने वाले दिनों में अगर केयर्न इंडिया पर काबिज हो जाता है तो कबाड़ी से करियर की शुरुवात करने वाले इसके मालिक अनिल अग्रवाल भारत के सबसे अमीर व्यक्ति के रुप में शुमार हो जायेंगे. हालांकि उनकी कंपनी वेदांता एक ब्रिटिश कंपनी है.

अभी मुकेश अंबानी की अगुवाई वाला आरआईएल समूह अग्रवाल के वेदांता समूह के मुकाबले ज्यादा अमीर है और टाटा समूह (3,70,000 करोड़) इन दोनों से आगे है. मगर, प्रमोटर की संपत्ति के लिहाज से देखा जाए तो रतन टाटा मुकेश अंबानी और अनिल अग्रवाल के सामने कहीं नहीं ठहरते.

ब्रिटिश कंपनी वेदांता रिसोर्सेस लिमिटेड ने तेल और गैस क्षेत्र में उतरने के लिए 9.6 अरब डॉलर के निवेश से कैयर्न इंडिया में 60 प्रतिशत तक हिस्सेदारी खरीदने की योजना बनाई है। वेदांता ने कहा है कि इसका नकद भुगतान किया जाएगा और कुछ राशि ऋण से जुटाई जाएगी. कैर्न इंडिया की 70 प्रतिशत हिस्सेदारी राजस्थान तेल विकास परियोजना में है जिसमें तकरीबन 6.5 अरब बैरल तेल और गैस है। कैर्न इंडिया की प्रतिदिन उत्पादन क्षमता सवा लाख बैरल है.

कैर्न इंडिया में 62.4 प्रतिशत हिस्सेदारी रखने वाली ब्रिटिश कंपनी कैर्न एनर्जी ने कहा है कि कैर्न इंडिया की 40 से 51 प्रतिशत हिस्सेदारी वेदांता को बेच दी जाएगी। बाकी 20 प्रतिशत हिस्सेदारी वेदांता को खुले बाजार से खरीदनी होगी.

केयर्न इंडिया के अधिग्रहण और स्टरलाइट समूह के प्रस्तावित आईपीओ के बाद इसकी प्रमोटर फैमिली के प्रमुख के रूप में अनिल अग्रवाल की संपत्ति करीब 1,67,000 करोड़ रुपए हो जाएगी. अब तक मुकेश अंबानी 1,45000 करोड़ रुपए की संपत्ति के साथ सबसे अमीर आदमी के पद पर काबिज हैं. 1,67,000 करोड़ रुपए के बाद अनिल अग्रवाल सबसे अमीर के रुप में माने जायेंगे.

वेदांता के खिलाफ उड़ीसा में आदिवासियों को उनकी जमीन से बेदखल करने के गंभीर आरोप लगे हैं. इसके अलावा इस कंपनी पर पर्यावरणके के खिलाफ भी काम करने के मुकदमे चल रहे हैं. छत्तीसगढ़ में तो इस समूह ने सरकार के कुछ लोगों की मदद से सरकारी जमीन पर ही कब्जा जमा रखा है.

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Sainny Ashesh (sainny.ashesh@gmail.com) Western Himalayas

 
 आदमी भीतर से जितना फटेहाल और कंगाल होता है, बाहर से उतना ही मालामाल और भुक्खड़ होता है. असली शहंशाही को वेदांता या अमिताभ बच्चन की शातिर अमीरी नहीं, गुज़ारे लायक रोटी, कपडा और मकान चाहिए.

लेकिन कबाड़िये जब तक दूसरों से बहुत चालाकी से छीने गए पैसे की दो कौड़ी की औकात नहीं देख लेंगे, उन्हें अक्ल भी तो नहीं आ सकती. लगे रहो मूढ़ता के बंधुआ मजदूरों ! अपनी असली पहचान और असली हैसियत पर आ ही जाओ. उस से पहले बात बनेगी भी नहीं. हाँ बीच में कहीं सिपाही और माओवादी एक हो गए तो सड़क पर कटोरा लिए मिलोगे.
 
   

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