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इस अंक में

 

लेकिन असली नायक कहां हैं?

बौद्धिक बेहूदगी और बेहद बौद्धिक अंबेडकर

सुनामी की लहरों में श्रीलंका की खेती

हमारी चिंतना

ममता बनर्जी के नाम एक खुला पत्र

कमजोर सरकार और गैरजिम्मेवार पत्रकारिता

अमन की असली दुआ

बाबा बनाते चैनल

राज्य का कन्या ‘दान’

लहू का सुराग़

मध्य-पूर्व में अमरीकी हांका

कम से कम एक दरवाज़ा

सुनामी की लहरों में श्रीलंका की खेती

लेकिन असली नायक कहां हैं?

बौद्धिक बेहूदगी और बेहद बौद्धिक अंबेडकर

चिकनी चमेली से डरता कौन है ?

सबको खारिज करने का अधिकार

ये कहां आ गये हम

यह सबके लिये चेतावनी है

 
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ओडीशा में वेदांता को दी गई अनुमति रद्द

ओडीशा में वेदांता को दी गई अनुमति रद्द

नई दिल्ली. 24 अगस्त 2010


केंद्र सरकार ने ब्रिटिश कंपनी वेदांता रिसोर्सेस को ओडीशा के नियामगिरि में बॉक्साइट खनन के लिए दी गई पर्यावरणीय अनुमति को रद्द कर दिया है.

केंद्रीय पर्यावरण मंत्री जयराम रमेश ने कुल 1.7 अरब डॉलर की इस खनन परियोजना के लिये दी गई पर्यावरणीय मंजूरी को रद्द करते हुये कहा कि इस परियोजना के लिए पर्यावरणीय संरक्षण क़ानून, वन सुरक्षा अधिनियम और वन अधिकार क़ानून का गंभीर उल्लंघन हुआ है.


ज्ञात रहे कि केंद्र सरकार के आदेश पर पिछले दिनों इस खनन से होने वाले दुष्प्रभाव को लेकर जांच की गई थी. केंद्र सरकार द्वारा गठित एनसी सक्सेना कमेटी की रिपोर्ट में कहा गया था कि वेदांता के खदान के आने से लगभग सत्तर लाख वर्ग किलोमीटर में फैले जंगल बर्बाद हो जाएंगे और डोंगरिया कोंध जनजाति का अस्तित्व ख़तरे में पड़ जाएगा.

कमेटी ने अपनी रिपोर्ट में साफ कहा था कि किसी निजी कंपनी को लाभ पहुंचाने के लिए प्रस्तावित खनन स्थल पर दो आदिम जनजाति समूहों-कुटिया और डोंगरिया कोंध- के अधिकारों को छीन कर प्रस्तावित इलाके में खनन की अनुमति देने से जनजातियों का कानून से भरोसा टूट जाएगा.

इस बदनाम ब्रिटिश कंपनी वेदांता को लेकर कमेटी ने राय दी थी कि चूंकि वेदांता ने बार-बार कानून का उल्लंघन किया है, लिहाजा इसे प्रस्तावित खनन इलाके में जनजातियों के अधिकारों की कीमत पर खनन की फिर अनुमति देने से देश की सुरक्षा और बेहतरी के लिए गंभीर खतरा पैदा हो सकता है.

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इस समाचार / लेख पर पाठकों की प्रतिक्रियाएँ

 
 

bhagat singh raipur

 
 जयराम रमेश को बधाई तो देनी ही पड़ेगी. पिछले दिनों रायगढ़ में जिंदल से लेकर सरगुजा तक में उन्होंने ऐसे निर्णय लिए हैं. पता नहीं ये सब कितने दिन टिकता हैं. निर्णय की बात नहीं जयराम रमेश की बात कह रहा हूँ. आज सावधिक लोकप्रिय मंत्री के रूप में गिने जाने लगे. खतरा बहुत हैं आगे देखते हैं क्या होता है. 
   
 

Sainny Ashesh (sainny.ashesh@gmail.com) Western Himalayas

 
 इब्तिदा-ए-इश्क है रोता है क्या
आगे आगे देखिये होता है क्या

बहुत खून पी चुकी सरकारें और उनके दुलारे !
 
   

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