पहला पन्ना प्रतिक्रिया   Font Download   हमसे जुड़ें RSS Contact
larger
smaller
reset

इस अंक में

 

के बनी राष्ट्रपति ?

सुनो शाहरुख खान

माओवादी सिनी सय की कहानी

लेकिन असली नायक कहां हैं?

सुनामी की लहरों में श्रीलंका की खेती

ममता बनर्जी के नाम एक खुला पत्र

अमन की असली दुआ

बाबा बनाते चैनल

राज्य का कन्या ‘दान’

लहू का सुराग़

मध्य-पूर्व में अमरीकी हांका

कम से कम एक दरवाज़ा

माओवादी सिनी सय की कहानी

के बनी राष्ट्रपति ?

सुनो शाहरुख खान

चिकनी चमेली से डरता कौन है ?

सबको खारिज करने का अधिकार

ये कहां आ गये हम

यह सबके लिये चेतावनी है

 
 पहला पन्ना > मुद्दा > छत्तीसगढ़ Print | Send to Friend | Share This 

वेदांता से पुरस्कार वापस, मजदूरों की हत्या छुपाई थी

वेदांता से पुरस्कार वापस, मजदूरों की हत्या छुपाई थी

नई दिल्ली. 30 अगस्त 2010


कबाड़ी से कुबेर बने अनिल अग्रवाल की ब्रिटिश कंपनी वेदांता की मुश्किलें कम होने का नाम नहीं ले रही हैं. ओडिशा में नियामगिरी में बाक्साइट उत्खनन की अनुमति को केंद्र सरकार द्वारा वापस लेने के बाद एक सप्ताह के भीतर दूसरा झटका उन्हें एक सम्मान वापसी के रुप में मिला है.

लंदन से प्रकाशित होने वाले गार्डियन समूह के ऑब्जर्वर अखबार द्वारा ब्रिटेन में सूचीबद्ध 12 सबसे बड़ी कम्पनियों की वार्षिक रिपोर्ट के विश्लेषण के बाद ब्रिटिश सुरक्षा परिषद ने वेदांता रिसोर्सेस को दिया गया सम्मान तत्काल वापस ले लिया है.


बाल्को में चिमनी गिरने से 40 मजदूरों की मौत की बात जाहिर ना करने के कारण ब्रिटिश सुरक्षा परिषद ने प्रमुख उत्खनन समूह वेदांता को दिया गया 2009 का अंतरराष्ट्रीय सुरक्षा सम्मान वापस ले लिया है. भारत में हाल में हुई यह सबसे बुरी औद्योगिक दुर्घटना थी. ब्रिटिश सेफ्टी काऊंसिल ने वेदांता से यह सम्मान छीनते हुए कहा कि पुरस्कारों की ईमानदारी का स्तर बनाए रखने के लिए ऐसा करना जरूरी था.

ऑब्जर्वर ने जिन 12 कंपनियों का विश्लेषण किया था, उनमें सबसे अधिक 67 मजदूरों की मौत के मामले वेदांता की विभिन्न इकाइयों में हुई थी. दूसरी किसी भी कंपनी में 20 से ज्यादा मौतें नहीं हुईं.

ज्ञात रहे कि वेदांता कोरबा में बाल्को विस्तार योजना के तहत अपने एल्युमीनियम संयंत्र में 1200 मेगावाट क्षमता का बिजली संयंत्र लगा रही थी. चीनी कंपनी सेप्को को इस संयंत्र को लगाने का ठेका मिला था, जबकि भाजपा नेता कमल मुरारका की जीडीसीएल 275 मीटर लंबी चिमनी का निर्माण कर रही थी. निर्माण में लापरवाही के कारण पिछले साल 23 सितंबर को चिमनी धंस गई, जिसमें दबकर 40 मजदूर मारे गये थे.

सभी प्रतिक्रियाएँ पढ़ें
 

इस समाचार / लेख पर पाठकों की प्रतिक्रियाएँ

 
 

prakash chandra jha (prapoorna2006@gmail.com) new delhi

 
 This is the true face of neo imperialism. Where were the mainstream media when the incident happened. There is deep rooted nexus between media, lobbyist, capitalist and politicians. Every one is there for the capitalist and against the poor and oppressed. 
   
 

ABDUL ASLAM (aslamimage@rediffmail.com) KORBA

 
 अवार्ड पाने के होड़ में वेदांता ने बालको चिमनी हादसा में मरे निर्दोष मजदूरों की मौत के आंकड़े छुपाकर बड़े भूल की. गौर का विषय तो ये है की इतना बड़े औद्योगिक हादसे के बाद भी आज तक अनिल अग्रवाल बालको को झाकने तक नहीं आए. लेकिन सवाल ये उठा है इंटरनेशनल मीडिया में बालको चिमनी हादसा के आने के बाद भी ब्रिटिश सेफ्टी कौंसिल को कैसे नहीं पता चला, ताज्जुब की बात है. 
   
 

Sainny Ashesh (sainny.ashesh@gmail.com) Western Himalayas

 
 वेदांता से लेकर अमिताभ बच्चन तक अब सब जान लें कि दौलत और शोहरत को ज़िंदगी की असली कमाई समझने वाली मानसिकता के दिन बीत गए.  
   

इस समाचार / लेख पर अपनी प्रतिक्रिया हमें प्रेषित करें

  ई-मेल ई-मेल अन्य विजिटर्स को दिखाई दे । ना दिखाई दे ।
  नाम       स्थान   
  प्रतिक्रिया
    Please type The Number in the Box
   

 
  ▪ हमारे बारे में   ▪ विज्ञापन   |  ▪ उपयोग की शर्तें
2009-10 Raviwar Media Pvt. Ltd., INDIA. feedback@raviwar.com  Powered by Medialab.co.in