वेदांता से पुरस्कार वापस, मजदूरों की हत्या छुपाई थी
वेदांता से पुरस्कार वापस, मजदूरों की हत्या छुपाई थी
नई दिल्ली. 30 अगस्त 2010
कबाड़ी से कुबेर बने अनिल
अग्रवाल की ब्रिटिश कंपनी वेदांता की मुश्किलें कम होने का नाम नहीं ले रही हैं.
ओडिशा में नियामगिरी में बाक्साइट उत्खनन की अनुमति को केंद्र सरकार द्वारा वापस
लेने के बाद एक सप्ताह के भीतर दूसरा झटका उन्हें एक सम्मान वापसी के रुप में मिला
है.
लंदन से प्रकाशित होने वाले गार्डियन समूह के ऑब्जर्वर अखबार द्वारा ब्रिटेन में
सूचीबद्ध 12 सबसे बड़ी कम्पनियों की वार्षिक रिपोर्ट के विश्लेषण के बाद ब्रिटिश
सुरक्षा परिषद ने वेदांता रिसोर्सेस को दिया गया सम्मान तत्काल वापस ले लिया है.
बाल्को में चिमनी गिरने से 40 मजदूरों की मौत की बात जाहिर ना करने के कारण
ब्रिटिश सुरक्षा परिषद ने प्रमुख उत्खनन समूह वेदांता को दिया गया 2009 का
अंतरराष्ट्रीय सुरक्षा सम्मान वापस ले लिया है. भारत में हाल में हुई यह सबसे बुरी
औद्योगिक दुर्घटना थी. ब्रिटिश सेफ्टी काऊंसिल ने वेदांता से यह सम्मान छीनते हुए
कहा कि पुरस्कारों की ईमानदारी का स्तर बनाए रखने के लिए ऐसा करना जरूरी था.
ऑब्जर्वर ने जिन 12 कंपनियों का विश्लेषण किया था, उनमें सबसे अधिक 67 मजदूरों की
मौत के मामले वेदांता की विभिन्न इकाइयों में हुई थी. दूसरी किसी भी कंपनी में 20
से ज्यादा मौतें नहीं हुईं.
ज्ञात रहे कि वेदांता कोरबा में बाल्को विस्तार योजना के तहत अपने एल्युमीनियम संयंत्र में 1200 मेगावाट
क्षमता का बिजली संयंत्र लगा रही थी. चीनी कंपनी सेप्को को इस संयंत्र को लगाने का
ठेका मिला था, जबकि भाजपा नेता कमल मुरारका की जीडीसीएल 275 मीटर लंबी चिमनी का
निर्माण कर रही थी. निर्माण में लापरवाही के कारण पिछले साल 23 सितंबर को चिमनी धंस
गई, जिसमें दबकर 40 मजदूर मारे गये थे.