जबान संभाल कर बात करें शरद पवार-सुप्रीम कोर्ट
जबान संभाल कर बात करें शरद पवार-सुप्रीम कोर्ट
नई दिल्ली. 31 अगस्त 2010
देश भर में गोदामों में सड़ रहे लाखों टन गेंहू के मामले में आज एक बार फिर
सुप्रीम कोर्ट ने कड़ा रुख अख्तियार करते हुए केंद्रीय कृषि मंत्री शरद पवार को
लताड़ा. कोर्ट ने कहा कि हमने सलाह नहीं, आदेश दिया था.
ज्ञात रहे कि 12 अगस्त को देश भर के गोदामों में सड़ रहे हजारों टन अनाज पर उच्चतम
न्यायालय ने कहा था कि सड़ने से तो अच्छा है कि सरकार इसे गरीब और भूखे लोगों में
मुफ्त बंटवा दे. कोर्ट ने आश्चर्य जताते हुये कहा था कि एक तरफ इतनी बड़ी तादाद में
अनाज सड़ रहा है, वहीं लगभग 20 करोड़ लोग कुपोषण के शिकार हैं.
पीयूसीएल द्वारा दायर एक जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुये उच्चतम न्यायालय में जस्टिस दलवीर भंडारी
व जस्टिस दीपक वर्मा की खंडपीठ ने कहा था कि अनाज को भूखे लोगों तक पहुंचाइए, बजाय
इसके कि वह नालियों में बहे. खंडपीठ ने केंद्र सरकार से यह भी कहा था है कि वह हर
प्रदेश में एक बड़ा गोदाम बनाने की व्यवस्था सुनिश्चित करे और संभाग और जिले स्तर
पर भी ऐसे गोदाम बनाये जायें.
कोर्ट के इस आदेश को लेकर पूछे जाने पर कृषि मंत्री शरद पवार ने अपने बयान में कहा
था कि जो अनाज गोदामों के बाहर बर्बाद हो रहा है, उसे गरीबों को नहीं बांटा जा
सकता. खाद्य और कृषि मंत्री शरद पवार ने कहा था कि न्यायालय के आदेश का पालन करना
संभव नहीं है. उन्होंने कहा कि सरकार मुफ्त में अनाज का वितरण नहीं कर सकती है,
लेकिन सस्ती दर पर चावल एवं गेहूं उपलब्ध करा सकती है. पवार ने कहा था कि गरीबों के
लिये अंत्योदय अन्न योजना (एएवाई) चलाई जा रही है. हम गेहूं 16 रुपए खरीद रहे हैं
और दो रुपए प्रति किलो पर बेच रहे हैं. उच्चतम न्यायालय ने जो कहा है, हम पहले से
ही ऐसा कर रहे हैं.
मंगलवार को सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में शरद पवार को फटकार लगाते हुए कहा है कि
कोर्ट ने उन्हें सलाह नहीं आदेश दिया था. अदालत ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट संबंधी
बयान देते वक्त वो जबान संभालकर बात करें और इस तरह कि गलतबयानी से बचें.