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महिलायें भी ले बच्चा गोद ले सकेंगी

महिलायें भी ले बच्चा गोद ले सकेंगी

नई दिल्ली. 3 सितंबर 2010


भारत में अब मां को भी संतान पर पिता के बराबर का हक मिल गया है. इसके साथ-साथ महिलाएं अब बच्चे को गोद भी ले सकेंगी. राष्ट्रपति प्रतिभा पाटील ने इस आशय के संशोधित कानून को मंजूरी दे दी है. अब तक सिर्फ पुरुषों को ही गोद लेने व संतान का अभिभावक होने का हक था. संसद ने हाल ही में इससे संबंधित निजी कानून संशोधन बिल 2010 पारित किया था.

इस संशोधन के तहत गार्डियन्स एंड वार्डस एक्ट, 1890 तथा हिंदू गोद प्रथा तथा मेंटेनेंस कानून, 1956 में संशोधन किया गया है. जिसकी सूचना गजट में 1 सितंबर को प्रकाशित की गई है.

गार्डियन्स एंड वार्डस एक्ट ईसाइयों, मुस्लिमों, पारसी तथा यहूदियों पर लागू होता है. यह कानून 120 वर्ष पुराना है. इसमें किए गए संशोधन से पिता के साथ माता भी अभिभावक नियुक्त की जा सकेगी. पिता की मृत्यु पर अदालतों को किसी अन्य व्यक्ति को अभिभावक नियुक्त करने की जरूरत नहीं होगी. इस प्रकार इस मामले में लिंगभेद खत्म हो जाएगा.

दूसरा संशोधन हिंदू गोद प्रथा तथा मेंटेनेंस कानून, 1956 में किया गया है. यह कानून हिंदू, जैन, बौद्ध व सिख पर प्रभावी होता है. इसका मकसद विवाहित महिलाओं के लिए गोद लेने की राह से बाधाएं हटाना है. अब तक अविवाहित, तलाकशुदा तथा विधवा महिलाओं को बच्चे को गोद लेने का हक था. लेकिन, जो महिलाएं अपने पति से अलग रहते हुए तलाक के लिए कानूनी लड़ाई में उलझती थीं वे किसी बच्चे को गोद नहीं ले सकती थीं. नए संशोधन के बाद पति से अलग रह रही विवाहित महिला को भी अपने पति की रजामंदी से बच्चे को गोद लेने का हक होगा. यह इजाजत तलाक की प्रक्रिया में भी मांगी जा सकती है. यदि पति अपना धर्म बदल लेता है या विक्षिप्त घोषित कर दिया जाए तो उसकी इजाजत जरूरी नहीं होगी.