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प्रचंड की हार का ठीकरा भारत पर

प्रचंड की हार का ठीकरा भारत पर

नई दिल्ली.6 सितंबर 2010


नेपाल का प्रधानमंत्री बनने से वंचित रह गये माओवादी नेता पुष्प कमल दहाल प्रचंड की पार्टी ने आरोप लगाया है कि भारत की गुप्तचर संस्था रॉ के कारण वे प्रधानमंत्री नहीं बन पाये.

पिछले कुछ महीनों में छठवीं बार नेपाल में प्रधानमंत्री पद के लिये चुनाव हुआ तो माओवादी नेता प्रचंड को एक बार फिर हार का सामना करना पड़ा. इस बार प्रचंड ने अपनी पार्टी और दूसरे माओवादी संगठनों के बीच तालमेल के अभाव के बजाय रॉ के सर पर हार का ठीकरा फोड़ा है.

ज्ञात रहे कि चुनाव से ऐन पहले एक ऑडियो टेप में माओवादी सांसद कृष्ण बहादुर म्हारा के एक व्यक्ति के साथ टेलीफोन पर हुई बातचीत में यह रहस्योद्घाटन हुआ था कि चीन की ओर से प्रचंड के पक्ष में सांसदों की खरीद-फरोख्त के लिये 50 करोड़ रुपये की सहायता की गई है. टेप के अनुसार तराई पार्टियों के निर्वाचित जनप्रतिनिधियों की खरीद के लिये एक चीनी दोस्त द्वारा म्हारा को पेशकश की गई थी.

हार का सामना करने के बाद रविवार को माओवादी पार्टी के मुखपत्र जनसंदेश में आरोप लगाया गया है कि माओवादी सांसदों में फूट डालने की नियत से इस तरह का झूठा टेप वितरित करवाया गया. प्रथम पृष्ठ में प्रकाशित इस आलेख में आरोप लगाया गया है कि रॉ ने न केवल इस टेप को मीडिया में बंटवाया, बल्की इसके प्रसारण के लिये मीडिया घरानों पर दबाव बनाये या उन्हें प्रलोभन दिया.

आलेख के अनुसार सांसदों की खरीदी के लिये रिश्वत देने के प्रयास का आरोप अविश्वसनीय है क्योंकि उनकी पार्टी की नीति सांसदों की खरीद-फरोख्त की नहीं है. लेख के अनुसार नेपाल में अटकलें हैं कि टेप के पीछे भारत का हाथ है और चीन को जानबूझकर विवाद में घसीटने के षड्यंत्र की बू आती है.