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स्टालिन के मानहानि का मुकदमा हार गया पोता

स्टालिन के मानहानि का मुकदमा हार गया पोता

मास्को. 23 सितंबर 2010


मास्को की एक अदालत ने रुस के पूर्व राष्ट्रपति जोसेफ स्टालिन के पोते की उस मानहानि की याचिका को खारिज कर दिया, जिसमें रशियन आर्काइव्स पर स्टालिन की छवि बिगाड़ने का आरोप लगाया गया था.

Stalin


रुस के तानशाह शासक स्टालिन के पोते इवजेनी ड्जूगाशविलि ने रशियन आर्काइव्स के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया था कि रशियन आर्काइव्स ने फर्जी दस्तावेजों के सहारे यह सिद्ध करने की कोशिश की थी कि उनके बाबा जोसेफ स्टालिन के आदेश से ही पोलैंड के 22 हजार अधिकारियों को मार डाला गया था.

ज्ञात रहे कि कुछ समय पूर्व ही ये दस्तावेज सार्वजनिक किये गये थे. इन दस्तावेजों के अनुसार एक मार्च 1940 को रूस की गुप्त पुलिस के मुखिया लॉवरेंटी बेरिया द्वारा स्टालिन को एक पत्र लिखा गया, जिसमें कैटिन के जंगलों में बंधक बनाये गये पोलैंड के 22 हजार अधिकारियों को जान से मारने की अनुमति मांगी गई थी. दस्तावेज में वह पत्र भी शामिल है.

इन दस्तावेजों के सामने आने से पहले रुस की सरकार इन बंधकों की हत्या का आरोप जर्मनी सेना पर लगाती रही थी. हालांकि बाद में 1990 के आसपास मिखाइल गोर्वाचोव ने यह माना था कि इन 22 हजार लोगों की हत्या स्टालिन के आदेश पर उनकी गुप्त पुलिस ने अंजाम दिया था.

इस साल जून में इन हत्याओं से संबंधित पत्र और दस्तावेज ऑनलाइन आने के बाद स्टालिन के पोते इवजेनी ड्जूगाशविलि ने सरकार के खिलाफ मुकदमा दर्ज करते हुए अपने बाबा की मानहानि का आरोप लगाते हुये एक करोड़ रुबल की रकम बतौर मुआवजा मांगा था. मास्को की एक अदालत ने इवजेनी ड्जूगाशविलि के मुकदमे को योग्य नहीं मानते हुये उसे खारिज कर दिया.


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