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कन्हैयालाल नंदन का निधन

कन्हैयालाल नंदन का निधन

नई दिल्ली. 25 सितंबर 2010


साहित्यकार औऱ पत्रकार कन्हैयालाल नंदन का शनिवार को निधन हो गया. वे पिछले कुछ दिनों से अस्वस्थ चल रहे थे.

1 जुलाई 1933 को गाँव परस्तेपुर, जिला फतेहपुर, में जन्में कन्हैयालाल नंदन सारिका,पराग,दिनमान,नवभारत टाईम्स, संडे मेल, इंडसइंड जैसी पत्रिकाओं के संपादक रहे. उन्होंने अपने जीवन के शुरुआती दौर में 4 साल तक मुंबई विश्वविद्यालय से सम्बद्ध कॉलेजों में अध्यापन किया. 1961 से 1972 तक टाइम्स ऑफ इंडिया प्रकाशन समूह के धर्मयुग में सहायक संपादक और 1972 से दिल्ली में क्रमशः पराग, सारिका और दिनमान के संपादक के तौर पर उन्होंने काम किया.

उन्होंने तीन वर्ष तक दैनिक नवभारत टाइम्स में फीचर संपादक के पद पर काम करने के बाद 6 सालों तक हिन्दी संडे मेल में प्रधान संपादक के पद पर उन्होंने काम किया. 1995 से वह इंडसइंड मीडिया में निदेशक के पद पर काम कर रहे थे. उन्हें भारतेंदु पुरस्कार, अज्ञेय पुरस्कार, मीडिया इंडिया, कालचक्र और रामकृष्ण जयदयाल सद्भावना पुरस्कार से सम्मानित किया गया था. 1999 में उन्हें पद्मश्री प्रदान किया गया था.

इस दौरान उन्होंने कई किताबें लिखीं, जिनमें लुकुआ का शाहनामा, घाट-घाट का पानी, अंतरंग नाट्य परिवेश, आग के रंग, अमृता शेरगिल, समय की दहलीज, बंजर धरती पर इंद्रधनुष, गुजरा कहाँ कहाँ से प्रमुख हैं.

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krishnabihari (krishnatbihari@yahoo.com) abudhabi

 
 वरिष्ठ कवि और समय समय पर विभिन्न पत्रिकाओं के संपादक रहे कन्हैया लाल नंदन का निधन साहित्य जगत की एक अपूरणीय क्षति है.दो वर्ष पूर्व जब उनकी आत्मकथा 'गुजरा कहाँ कहाँ से' छापकर आयी ही थी तभी उनसे एक संक्षिप्त सी भेंट हुई थी. उन दिनों भी वे अस्वस्थ चल रहे थे लेकिन अद्भुत ऊर्जा से लबरेज नंदनजी तब भी सबकी सहायता के लिए तत्पर रहते थे.एक बड़े कवि ही नहीं एक बड़े आदमी से हुई वह बहुत छोटी सी मुलाकात भी मेरे दिल में हमेशा के लिया यादगार बन गयी है. मेरी इस व्यक्तित्व को हार्दिक श्रद्धांजलि. 
   

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