पहला पन्ना प्रतिक्रिया   Font Download   हमसे जुड़ें RSS Contact
larger
smaller
reset

इस अंक में

 

क्यों बढ़ रहा भूख का आंकड़ा

हमारे कुलभूषण को छोड़ दो

भारत व अमेरिका में केमिकल लोचा

सवाल विकास की समझ का

प्रतिरोध के वक्ती सवालों से अलग

गरीबी उन्मूलन के नाम पर मज़ाक

जनमत की बात करिये सरकार

नेपाल पर भारत की चुप्पी

लोहिया काल यानी संसद का स्वर्णिम काल

स्मार्ट विलेज कब स्मार्ट बनेंगे

पाकिस्तान आंदोलन पर नई रोशनी

नर्मदा आंदोलन का मतलब

क्यों बढ़ रहा भूख का आंकड़ा

हमारे कुलभूषण को छोड़ दो

भारत व अमेरिका में केमिकल लोचा

युद्ध के विरुद्ध

किसके साथ किसका विकास

क्या बदल रहा है हिन्दू धर्म का चेहरा?

मोदी, अमेरिका और खेती के सवाल

 
 पहला पन्ना > राजनीति > मध्यप्रदेश Print | Send to Friend | Share This 

भोपाल गैस पीडितों को 72 करोड़ की अतिरिक्त मदद

भोपाल गैस पीडितों को 72 करोड़ की अतिरिक्त मदद

नई दिल्ली. 28 सितंबर 2010


गृहमंत्री पी चिदंबरम ने कहा है कि सभी हकदार गैस पीडितों को 31 दिसंबर तक मुआवजा बांट दिया जाएगा.

चिदंबरम ने यह भरोसा गैस त्रासदी को लेकर प्रधानमंत्री द्वारा गठित मंत्री समूह (जीओएम) की सोमवार को नार्थ ब्लॉक में हुई बैठक में दिलाया. इसके अलावा जीओएम ने मध्यप्रदेश सरकार के अनुरोध पर अतिरिक्त मुआवजे के लिए छोड़ दिए गए चार हजार लोगों को इसके दायरे में लाने की मांग मानते हुए 72 करोड़ रूपए देने का फैसला किया. बैठक में मप्र के गैस राहत एवं पुनर्वास मंत्री बाबूलाल गौर ने मंत्री समूह द्वारा मंजूर किए गए मुआवजे के बंटवारे का मामला उठाया था.

ज्ञात रहे कि 2-3 दिसंबर 1984 की रात भोपाल की यूनियन कार्बाइड इंडिया लिमिटेड की फैक्टरी से मिक नामक गैस के रिसाव ने भोपाल में मौत का तांडव मचा दिया था. इस हादसे में 15 हजार लोगों की मौत हुई थी और हजारों लोग हमेशा के लिये विकलांग हो गये थे.

इसी मामले से जुड़े कचरे के मुद्दे पर जीओएम ने कहा कि यूनियन कार्बाइड के जहरीले कचरे का निपटारा पीथमपुर में नहीं किया जाएगा. जीओएम ने यह फैसला मध्यप्रदेश सरकार, पर्यावरणविदों और मालवा के लोगों के जबर्दस्त विरोध को देखते हुए लिया. जीओएम ने मप्र सरकार की इस दलील को मंजूर कर लिया कि यूका के जहरीले रासायनिक कचरे को प्रमुख औद्योगिक नगर पीथमपुर में न तो जलाया जाए और न ही दफन किया जाए.

विशेषज्ञों के अनुसार यूनियन कार्बाइड का यह जहरीला कचरा इतना खतरनाक है कि दुनिया के सिर्फ तीन देशों कनाडा, जर्मनी और डेनमार्क में ही इसे सुरक्षित रूप से जलाने के प्लांट स्थित है. बताया जाता है कि इस कचरे को 1200 डिग्री सेंटीग्रेट से कम तापमान पर जलाये जाने पर इसमें से कई ऐसे रासायनिक तत्व निकलेंगे, जिससे पर्यावरण और जनस्वास्थ्य को गंभीर खतरा पैदा हो सकता है.

सरकार द्वारा इस कारखाने में व्याप्त कचरे की मात्रा 350 टन बताई जा रही है, जबकि सन् 1969 में कारखाना स्थापित होने के बाद से ही लगातार जहरीला कचरा भोपाल की जमीन पर फेंका जा रहा था, जिसकी कुल मात्रा 27000 टन है. सन् 2007 में मध्यप्रदेश उच्च न्यायालय ने अपने फैसले में 39.6 टन ठोस कचरा पीथमपुर तथा 346 टन ज्वलनशील अवशिष्ट को गुजरात के अंकलेष्वर में स्थित भस्मक में जलाने के निर्देश दिए थे, जबकि गुजरात सरकार ने इस कचरे को अपने यहां जलाने से इंकार कर दिया है. दूसरी ओर जून 2008 में मध्यप्रदेश सरकार द्वारा 39.3 टन कचरा पीथमपुर में दफन कर दिया गया.

नागरिक समूह के लगातार विरोध के बाद सोमवार को जीओएम ने निर्णय लिया कि यूनियन कार्बाइड के कचरे को औद्योगिक नगर पीथमपुर में न तो जलाया जाए और न ही दफन किया जाए.


इस समाचार / लेख पर अपनी प्रतिक्रिया हमें प्रेषित करें

  ई-मेल ई-मेल अन्य विजिटर्स को दिखाई दे । ना दिखाई दे ।
  नाम       स्थान   
  प्रतिक्रिया
   

 
  ▪ हमारे बारे में   ▪ विज्ञापन   |  ▪ उपयोग की शर्तें
2009-10 Raviwar Media Pvt. Ltd., INDIA. feedback@raviwar.com  Powered by Medialab.in