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अयोध्या पर याचिका खारिज, 30 को फैसला

अयोध्या पर याचिका खारिज, 30 को फैसला

नई दिल्ली. 28 सितंबर 2009


उच्चतम न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश एसएच कपाड़िया की अध्यक्षता में तीन जजों की पीठ ने मंगलवार को अयोध्या के मसले पर इलाहाबाद हाईकोर्ट के फ़ैसले टालने संबंधी याचिका को ख़ारिज कर दिया है.

अब हाई कोर्ट अयोध्या विवाद पर फ़ैसला सुनाने को स्वतंत्र है.

चीफ जस्टिस एसएच कपाड़िया की अध्यक्षता में जस्टिस आफताब आलम और जस्टिस केएस राधाकृष्णन की बेंच ने इस याचिका पर सुनवाई करते हुये कहा कि याचिकाकर्ताओं की दलीलों को विस्तार से सुनने के बाद हमारा मत है कि ये याचिकाएँ ख़ारिज करने लायक हैं.

सोमवार को सुन्नी वक्फ बोर्ड और अखिल भारत हिंदू महासभा ने इस मामले में सुलह की किसी संभावना से इनकार कर दिया था. उधर निर्मोही अखाड़ा फैसला तीन माह टलवाने के पक्ष में था और उसने बातचीत से विवाद को सुलझाने की अपील की थी.

अयोध्या में विवादित स्थल की जमीन के मालिकाना हक को लेकर 1950 से मुकदमा चल रहा है. इसमें चार मुख्य दावेदार हैं- सुन्नी वक्फ बोर्ड, निर्मोही अखाड़ा, रामजन्मभूमि न्यास तथा दिवंगत गोपाल सिंह विशारद. इनके वकीलों का कहना है कि वे कोई समझौते की बात नहीं चला रहे हैं.

ज्ञात रहे कि अयोध्या मामले पर इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ बेंच 24 सितंबर को फैसला सुनाने वाली थी. लेकिन रमेश चंद्र त्रिपाठी ने एक याचिका लगाकर इस फैसले को टालने का अनुरोध किया था. जिस पर इलाहाबाद उच्च न्यायालय की विशेष पीठ ने अयोध्या विवाद का हल सुलह-समझौते से कराने के लिए दायर अर्जी को न केवल खारिज कर दिया, बल्कि इसे फैसले में बाधा डालने की कोशिश भी करार देते हुये अर्जी दाखिल करने वाले पक्षकार रमेश चंद्र त्रिपाठी पर पचास हजार रुपये जुर्माना भी लगा दिया.

बाद में रमेश चंद्र त्रिपाठी ने उच्चतम न्यायालय में याचिका लगाई, जिसके बाद इलाहाबाद उच्च न्यायालय के 24 सितंबर को आने वाले फैसले पर रोक लगा दी गई थी.

इससे पहले वित्त मंत्री प्रणब मुखर्जी ने मुर्शिदाबाद जिले के सागरदिघी में आयोजित एक कार्यक्रम में कहा कि "हम अदालत के फैसले का इंतजार कर रहे हैं. इस विवाद का दो समाधान है. कांग्रेस पार्टी और सरकार दोनों समाधान स्वीकार करने को तैयार है." मुखर्जी ने कहा, "या तो जिन लोगों ने एक-दूसरे के खिलाफ मामले दर्ज कराए हैं, वे मिल-बैठकर मामले को सुलझा लें, हम इसे स्वीकार कर लेंगे. अन्यथा, अदालत का जो भी फैसला आता है, वह भी हमें स्वीकार्य है."

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