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अयोध्या रामलला की जन्मभूमि

अयोध्या रामलला की जन्मभूमि

अयोध्या. 30 सितंबर 2010


अयोध्या मामले पर एक ऐतिहासिक फ़ैसले में इलाहाबाद हाई कोर्ट की लखनऊ पीठ की तीन जजों की बेंच ने विवादित भूमि को रामजन्मभूमि माना है. उनका कहना है कि रामलला को हटाया नहीं जाएगा.

Ayodhya-decision


जस्टिस एसयू खान, जस्टिस सुधीर अग्रवाल और जस्टिस धर्मवीर शर्मा की पीठ ने साफ कहा है कि जहां अभी रामलला की मूर्ति है, वह भगवान राम की जन्मभूमि है. इस स्थल से रामलला की मूर्तियां हटाई नहीं जाएंगी.

विवादित भूमि का एक तिहाई निर्मोही अखाड़ा को दिये जाने के निर्देश दिये गये हैं. अदालत के दो जजों ने यह फ़ैसला भी दिया कि इस भूमि के कुछ हिस्सों पर मुसलमान प्रार्थना करते रहे हैं इसलिए ज़मीन का एक तिहाई हिस्सा मुसलमान गुटों दे दिया जाए.

अयोध्या में विवादित स्थल की जमीन के मालिकाना हक को लेकर 1950 से मुकदमा चल रहा है. इसमें चार मुख्य दावेदार हैं- सुन्नी वक्फ बोर्ड, निर्मोही अखाड़ा, रामजन्मभूमि न्यास तथा दिवंगत गोपाल सिंह विशारद. इनके वकीलों का कहना है कि वे कोई समझौते की बात नहीं चला रहे हैं.

ज्ञात रहे कि अयोध्या मामले पर इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ बेंच 24 सितंबर को फैसला सुनाने वाली थी. लेकिन रमेश चंद्र त्रिपाठी ने एक याचिका लगाकर इस फैसले को टालने का अनुरोध किया था. जिस पर इलाहाबाद उच्च न्यायालय की विशेष पीठ ने अयोध्या विवाद का हल सुलह-समझौते से कराने के लिए दायर अर्जी को न केवल खारिज कर दिया, बल्कि इसे फैसले में बाधा डालने की कोशिश भी करार देते हुये अर्जी दाखिल करने वाले पक्षकार रमेश चंद्र त्रिपाठी पर पचास हजार रुपये जुर्माना भी लगा दिया.

बाद में रमेश चंद्र त्रिपाठी ने उच्चतम न्यायालय में याचिका लगाई, जिसके बाद इलाहाबाद उच्च न्यायालय के 24 सितंबर को आने वाले फैसले पर रोक लगा दी गई थी. इसके बाद 28 सितंबर को उच्चतम न्यायालय ने इलाहाबाद न्यायालय को फैसले पर लगाई गई रोक हटा दी गई.


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