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जस्टिस सभरवाल के खिलाफ हुई थी जांच

जस्टिस सभरवाल के खिलाफ हुई थी जांच

नई दिल्ली. 8 अक्टूबर 2010


भारत के पूर्व मुख्य न्यायाधीश वाईके सभरवाल के खिलाफ नोएडा के 2004 के प्लॉट घोटाले में संलिप्तता को लेकर सीबीआई ने जांच की थी. इस मामले में सभरवाल पर पद के गुरुपयोग का आरोप लगा था. कानून मंत्रालय ने सूचना के अधिकार के तहत सुभाष अग्रवाल को यह जानकारी दी है.

supreme court


जानकारी के अनुसार सीबीआई ने दो लोगों के खिलाफ गाजियाबाद कोर्ट में मामला दायर किया था और इसकी प्रति कानून मंत्रालय को दी थी. ज्ञात रहे कि मीडिया में सभरवाल के भ्रष्टाचार में शामिल होने संबंधी खबर आने के बाद उन्हें मानवाधिकार आयोग का अध्यक्ष का पद ऑफर नहीं किया गया था.

ज्ञात रहे कि हाल ही में पूर्व कानून मंत्री शांति भूषण ने हलफनामा देकर 16 में से आठ मुख्य न्यायाधीशों के भ्रष्ट होने की दावा किया था. इन 16 जजों में वाई के सभरवाल का भी नाम शामिल था.

3 अगस्त, 2007 को कैंपेन फॉर ज्यूडिशियल अकाउंटेबिलिटी ने एक प्रेस विज्ञप्ति जारी की थी. इसमें चीफ जस्टिस वाईके सभरवाल के खिलाफ कई गंभीर आरोपों का ब्योरा था. इनमें सबसे गंभीर आरोप यह था कि उन्होंने दिल्ली में आवासीय इलाकों से संचालित व्यावसायिक प्रतिष्ठानों की सीलिंग के कई आदेश जारी किए थे. इसका तात्कालिक असर यह हुआ कि लोगों को दुकानों और ऑफिसों को तुरंत ही शॉपिंग मॉलों और बिल्डरों व डेवलपरों द्वारा बनाए गए व्यावसायिक कॉम्प्लेक्सों में शिफ्ट करना पड़ा. नतीजतन इनका किराया रातों-रात आसमान छूने लगा.

विज्ञप्ति के अनुसार जिस समय सभरवाल ने ये आदेश जारी किए, उसी दौरान उनके बेटों ने दिल्ली के कुछ शॉपिंग मॉल्स और व्यावसायिक कॉम्प्लेक्सों में साझेदारी हासिल कर ली और आदेश के बाद मोटा मुनाफा कमाया. साथ ही उसी दौरान उनके बेटों की कंपनियों के पंजीकृत कार्यालय जस्टिस सभरवाल के सरकारी निवास से चल रहे थे. इसके अलावा अमर सिंह टेप मामले की सुनवाई के दौरान उत्तर प्रदेश की मुलायम सिंह सरकार द्वारा नोएडा में उनके बेटों को काफी सस्ते दामों पर विशाल व्यावसायिक प्लॉट आवंटित किए गए थे. सभरवाल ने इन टेपों के प्रसारण और प्रकाशन पर रोक का आदेश दिया था.

जस्टिस सभरवाल जब सीलिंग मामले की सुनवाई कर रहे थे तब उनके बेटों का सालाना कारोबार दो करोड़ रुपए था. लेकिन मार्च, 2007 में उन्होंने महारानी बाग में 15.43 करोड़ की संपत्ति खरीद ली. उसके बाद हाल ही में अप्रैल, 2010 में उन्होंने दिल्ली के 7, सिकंदरा रोड के पास 122 करोड़ रुपए (अपने बिल्डर दोस्तों के साथ साझीदारी में) में एक संपत्ति खरीदी है. इस संपत्ति की कीमत 150 करोड़ रुपए से ज्यादा की थी, लेकिन दिल्ली हाई कोर्ट के एक जज द्वारा दिए गए कई अनैतिक आदेशों की मदद से सभरवाल के बेटों को यह संपत्ति 122 करोड़ रुपए में मिल गई.

सभरवाल के खिलाफ एक और मामला सामने आया था, जिसके अनुसार 2005 में वह एडिनबर्ग, वाशिंगटन और पेरिस में सरकारी कांफ्रेंस के लिए गए थे. इस 11 दिवसीय कांफ्रेंस के नाम पर वाईके सभरवाल ने कुल 38 दिनों की छुट्टी ली, जिसमें 21 दिन उनका निजी दौरा था. इस दौरे के लिये वह सीधे पेरिस पहुंचने के बजाये घूमते-घामते वाशिंगटन से बाल्टीमोर, ओरलांडो और अटलांटा होते हुए कांफ्रेंस के लिए पेरिस पहुंचे. उनके इस पूरे दौरे के लिए वायुयान में प्रथम श्रेणी के हवाई यात्रा का किराया सरकारी खाते से गया.


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