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छत्तीसगढ़: पुलिस मुठभेड़ में 8 नक्सली मरे

छत्तीसगढ़: पुलिस मुठभेड़ में 8 नक्सली मरे

रायपुर. (छत्तीसगढ़) 9 अक्टूबर 2010

 

छत्तीसगढ़ के महासमुंद जिले के पिथौरा ब्लॉक के ग्राम रीखादादर में पुलिस बल से मुठभेड़ में 8 नक्सली मारे गए. वहीं पुलिस बल के दो जवान गोली लगने से घायल हो गए. नक्सली उड़ीसा सीमा पार करने की तैयारी में थे. घटनास्थल से नक्सलियों के हथियार बरामद करने की भी खबर है. महासमुंद जिले में नक्सल मुठभेड़ की यह पहली घटना है. राज्य पुलिस के उच्च अधिकारियों से मिली जानकारी के अनुसार यह कार्रवाई पुलिस सशस्त्र बल ने की.

पुलिस बल ने सूचना के आधार पर रीखादादर के जंगल में कैंप कर रहे नक्सलियों को चारों तरफ से घेर लिया गया. मुठभेड़ में आधा दर्जन से ज्यादा नक्सली मारे गए जबकि पुलिस बल के 2 जवान गोली लगने से घायल हो गए. इसके पहले इसे सीआरपीएफ और पुलिस बल का संयुक्त ऑपरेशन माना जा रहा था. यह भी खबर आ रही थी कि सीआरपीएफ के नए डीजी के विजय कुमार खुद घटनास्थल पहुंच कर मोर्चा संभाल लिया.

ग्रामीणों से मिली जानकारी के अनुसार नक्सलियों के इस दस्ते में लगभग 70 सदस्य हैं. रीखादादर के आसपास उतने सघन जंगल नहीं है अलबत्ता छोटी पहाडिय़ां सी हैं. उड़ीसा में वह नरसिंगनाथ के जंगलों से जा लगता है. हमारे पिथौरा संवाददाता के अनुसार रीखादादर के पास छोटे लोरम गांव के आनंद पटेल नामक किसान के सिर छिपने और इसके परिवार को बंधक बनाने की खबर भी ग्रामीणों ने दी है. पखवाड़े भर से जिले के सीमावर्ती ग्रामों में नक्सली बेखौफ क्रांतिकारी गीत-संगीत के साथ नक्सलवाद और उद्देश्य का प्रचार-प्रसार कर रहे हैं.

शुक्रवार 8 अक्टूबर की सुबह से ही बसना थाना के ग्राम बरनई दादर के समीप एक पहाड़ी पर हथियारों से लैस नक्सली समूह ने डेरा डाला था. इन्होंने पहले गांव के प्रमुख ग्रामीणों को बुलवाकर अपने भोजन की व्यवस्था कराई. जिसके बाद बरनई दादर सहित आसपास के क्षेत्र में नक्सलियों के डेरा डालने की खबर जंगल में आग की तरह फैल गई. लिहाजा क्षेत्र के ग्रामीण सहित स्कूली बच्चे भी उक्त पहाड़ी पर पहुंचने लगे एवं नक्सलियों से बेखौफ मिलकर ‘लाल सलाम’ का नारा लगाते रहे.

बसना थाना प्रभारी सीडी लहरे नक्सली मौजूदगी को स्वीकार भी करते रहे. लेकिन उच्चाधिकारियों के निर्देश के बगैर स्थानीय पुलिस किसी भी तरह का कदम उठाने से बचती रही. 8 अक्टूबर को अपराह्न लगभग 3 बजे छग सशस्त्र बल के लगभग 100 जवान नक्सली डेरे की ओर बढ़े लेकिन इसी समय खाना खा रहे नक्सलियों को इसकी जानकारी मिल गई और वे खाने के एवं खाना बनाने के कुछ बरतन छोडक़र वहां से भाग खड़े हुए.

शुक्रवार की रात ही नक्सली लौटना चाहते थे रात में नक्सलियों के विजेमाल के पास ही ठहरने की जानकारी मिली थी. इसके बाद आज तडक़े उनके एनएच 53 पार कर छवालीपतेरा होते हुए रीखादादर के आगे चले जाने की खबर थी. छ.ग. सशस्त्र बल लगातार उनके पीछे था. माना जा रहा है कि यहां से ढोढरकसा और शंकरपुर की 7-8 किलो मीटर दूरी पार कर नक्सली उड़ीसा चले गए होंगे.

नक्सलियों के गांवों में प्रवेश एवं ग्रामीणों से प्रत्यक्ष मुलाकात के बाद कुछ ग्रामीणों ने बताया कि नक्सली अपनी लड़ाई पुलिस, प्रशासन और शोषकों से बताते हैं. बस्तर में स्कूल भवनों को उड़ाने और निर्दोष ग्रामीणों की हत्या की सफाई भी दे रहे हैं. उनके अनुसार पुलिस बल स्कूल भवनों को अपने ठहरने के उपयोग में लाते है. इसलिए उन्हें उड़ा दिया जाता है. जबकि ग्रामीण र्दुघटनावश ही मारे जाते हैं. नक्सलियों से मिलने एवं क्रांतिकारी गीत-संगीत सुनने एवं उनके उद्दश्यों की जानकारी लेने के बाद अब क्षेत्र के ग्रामीणों में नक्सलियों के प्रति कुछ हमदर्दी दिखाई दे रही है. जबकि सूचना के बाद ही पुलिस ने न पहुंचने एवं पुलिस के नक्सलियों को घेरने के बजाए उन्हें खदेडऩे के प्रयास ग्रामीणों में पुलिस के प्रति नाराजगी है.

इधर सांकरा जोन से मिली जानकारी के अनुसार घायल दोनों जवानों को सामुदायिक स्वास्य्े केंद्र में लाया गया जहां प्राथमिक उपचार के बाद रायपुर लाया जाएगा. रीखदादर के जंगल और उसके आसपास के गांवों में पुलिस बल लगातार सर्चिंग कर रही है. कुछ जगहों पर नक्सलियों को घेरकर रखे जाने की खबर है.


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