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रिश्वतखोरी को वैध कर दें- सुप्रीम कोर्ट

रिश्वतखोरी को वैध कर दें- सुप्रीम कोर्ट

नई दिल्ली. 10 अक्टूबर 2010


रिश्वतखोरी के किस्सों से जूझते लोगों की परेशानियों पर तल्ख टिप्पणी करते हुये उच्चतम न्यायालय ने कहा है कि जिस तरीके से देश भर में रिश्वतखोरी बढ़ रही है, उसमें तो बेहतर है कि सरकार रिश्वत की दर तय कर दे.

उच्चतम न्यायालय


एक मामले की सुनवाई के दौरान व्यंग्य करते हुए न्यायमूर्ति मार्कंडेय काटजू और न्यायमूर्ति टीएस ठाकुर की पीठ ने कहा कि बेहतर है रिश्वतखोरी को वैध कर दें ताकि लोग एक निश्चित राशि देकर सरकारी विभागों में अपना काम करा ले. अदालत ने कहा कि बेहतर होगा रिश्वतखोरी की एक दर तय कर दी जाए, जिससे लोगों को भी रिश्वत देने में आसानी होगी. इससे हर आदमी को यह भी पता लग जाए की अमुख काम के लिए उसे कितनी रिश्वत देनी है.

अदालत ने रिश्वतखोरी पर कटाक्ष करते हुये कहा कि ऐसा किया जाए कि यदि कोई व्यक्ति मामले को निपटाना चाहता है तो उससे ढाई हजार रुपये मांगे जा सकते हैं. इस तरह से हर आदमी को पता चल लाएगा कि उसे कितनी रिश्वत देनी है। अधिकारी को मोलभाव करने की जरूरत नहीं है और लोगों को भी पहले से ही पता होगा कि उन्हें बिना किसी फिक्र के क्या देना है.

मामला हरियाणा के एक आयकर निरिक्षक मोहनलाल शर्मा का है, जिसे 10 हजार रुपये की रिश्वतखोरी के एक मामले में उच्च न्यायालय ने बरी कर दिया था. अदालत ने कहा कि आयकर, बिक्रीकर और आबकारी विभाग ऐसे सरकारी कार्यालय हैं, जहां बिना पैसे के काम ही नहीं होता. जिन पर भ्रष्टाचार रोकने की जिम्मेवारी थी, वही विभाग भ्रष्टाचार में लिप्त हो गये हैं.

सीबीआई की ओर से अतिरिक्त महाधिवक्ता पीपी मल्होत्रा ने बताया कि आरोपी को निचली अदालत से 1 साल की सजा हुई थी लेकिन उच्च न्यायालय ने उसे बरी कर दिया. आरोपी का तर्क था कि उसे गलत तरीके से फंसाया गया है, वह गरीब आदमी है.

अदालत ने आरोपी को तर्कों को खारिज करते हुये कहा कि आयकर, आबकारी और बिक्रीकर विभागों में भ्रष्टाचार व्याप्त है और इसके अधिकारी काफी अमीर है. इससे तो अच्छा यही होगा कि राज्य सरकारें रिश्वत को वैध कर दें. न्यायाधीशों ने अदालत में उपस्थित अधिवक्ता के के वेणुगोपाल से भी इस बारे में राय जाननी चाही.

चेक बाउंस के मामले में आरोपी की ओर से पेश हुये अधिवक्ता केके वेणुगोपाल पर निशाना साधते हुये अदालत ने कहा कि मिस्टर वेणुगोपाल हम आपके स्तर के वकील से इस तरह के लोगों के लिए मामला लड़ने की अपेक्षा नहीं करते। महात्मा गांधी भी एक वकील थे लेकिन इस तरह के लोगों के लिए नहीं लड़े. अदालत की इस टिप्पणी पर वेणुगोपाल ने उसी अंदाज में जवाब दिया कि माई लार्ड, इस स्थिति में मेरे अधिकतर मुवक्किल हाथ से निकल जाएंगे.

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इस समाचार / लेख पर पाठकों की प्रतिक्रियाएँ

 
 

बालेन्दु मिश्र सीतापुर

 
 सुप्रीम कोर्ट के द्वारा सही ही कहा गया है यह तो एक बानगी भर है. सीतापुर जनपद उत्तर प्रदेश राज्य का सबसे भ्रष्टतम जनपद है. भ्रष्टाचार चरम पर है. सारे जनपद में नरेगा योजना में करोड़ों रुपये का बंदरबाट किया गया, कोई देखने वाला नहीं है. पेंशन का घोटाला पहले ही उजागर हो चूका है. नरेगा का घोटाला पेंशन से बहुत बड़ा है. 
   
 

mansoor khan (mansoorwild@gmail.com) bilaspur chhattisgarh

 
 भ्रस्टाचार पर सख्ती से रोक लगनी चाहिए. इस पर किसी प्रकार की दर निर्धारित नहीं होना चाहिए. 
   

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