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छत्तीसगढ़ में पशु बलि पर विवाद

छत्तीसगढ़ में पशु बलि पर विवाद

रायपुर. 12 अक्टूबर 2010

 
छत्तीसगढ़ के भाजपा विधायक और धर्मस्व विभाग से संबद्ध राज्य के संसदीय सचिव युद्धवीर सिंह जूदेव राज्य के सुप्रसिद्ध चंद्रहासिनी देवी मंदिर में बकरे की बलि देकर विवादों के घेरे में आ गये हैं. छत्तीसगढ़ में पशुबलि प्रतिषेध अधिनियम 1989 के तहत पशु बलि प्रतिबंधित है और इसके उल्लंघन पर तीन महीने की जेल या जुर्माने का प्रावधान है.

राज्य के कई धार्मिक स्थलों पर भैंसा और बकरे की बलि देने की परंपरा रही है. विशेष तौर पर जांजगीर-चांपा जिले के चंद्रहासिनी देवी मंदिर में नवरात्रि के अवसर पर बड़ी संख्या में पशु बलि दी जाती रही है. पिछले साल अकेले इसी मंदिर में लगभग 14000 पशुओं की बलि दी गई थी.

इस साल भी जब पशु बलि की सुगबुगाहट हुई तो सरकार की ओर से मंदिर ट्रस्ट को नोटिस भेजी गई. मंदिर प्रबंधन की ओर से भी पशु बलि प्रतिबंधित किये जाने की सूचना मंदिर में लगाई गई. चन्द्रहासिनी मंदिर ट्रस्ट के अध्यक्ष गोबिन्द अग्रवाल के अनुसार हर साल पशु बलि के लिये दी जाने वाली रसीद भी ट्रस्ट ने इस साल नहीं काटी. लेकिन नवरात्रि से पहले ही धर्मस्व विभाग से संबद्ध राज्य के संसदीय सचिव युद्धवीर सिंह जूदेव अपने ही विभाग के आदेश खिलाफ ताल ठोंक कर खड़े हो गये.

ऑपरेशन घर वापसी के लिये चर्चित भाजपा सांसद दिलीप सिंह जूदेव के बेटे युद्धवीर सिंह ने सरकार को चुनौती देते हुये घोषणा की कि मंदिर में पशु बलि धार्मिक आस्था से जुड़ा हुआ मामला है और कोई भी सरकार इसे नहीं रोक सकती.

उन्होंने नवरात्रि में सबसे पहले खुद ही मंदिर में बकरे की बलि देने की घोषणा की और नवरात्रि के पहले दिन ही उनकी उपस्थिति में कई बकरों की बलि देकर मंदिर में पशु बलि की शुरुवात की गई. इसके बाद तो जैसे सिलसिला ही शुरु हो गया.

प्रदेश कांग्रेस के अध्यक्ष धनेंद्र साहू कहते हैं- “आश्चर्य है कि धर्मस्व विभाग के संसदीय सचिव ने आस्था के नाम पर कानून तोड़ा और अब तक उन पर कोई कार्रवाई नहीं हुई. इस मामले में तो जिले के कलेक्टर और एसपी के खिलाफ भी मामला दर्ज किया जाना चाहिये.”

जिले के कुछ धार्मिक संगठनों ने युद्धवीर सिंह जूदेव के खिलाफ जिले के चंद्रपुर थाने में नामजद रिपोर्ट कराई है लेकिन मामला अभी प्रारंभिक स्तर पर ही अटका हुआ है. जिले के एसपी आनंद छाबड़ा का कहना है कि इस मामले में कुछ संगठनों ने शिकायत की है और उनकी शिकायतों के आधार पर जांच चल रही है. जब तक जांच पूरी नहीं हो जाती, इस बारे में कुछ भी नहीं कहा जा सकता.

लेकिन इन सबों से दूर अपने गृहनगर जशपुर में नवरात्रि की पूजा में व्यस्त युद्धवीर सिंह का कहना है कि उन्हें राज्य सरकार द्वारा पशु बलि प्रतिबंध की जानकारी नहीं है. उनका कहना है कि अगर इस तरह का कोई प्रतिबंध है तो उसे तत्काल हटाया जाना चाहिये. उनका तर्क है कि राज्य में सदियों से पशु बलि की परंपरा रही है और यह आस्था का विषय है.

जूदेव कहते हैं- “पहले तो पूरे प्रदेश में बूचडखाने और कसाई घरों पर प्रतिबन्ध लगे, उसके बाद इस बारे में सोचा जायेगा. केंद्र की सरकार ने तो राष्ट्रमंडल खेल के दौरान गौ मांस से प्रतिबंध हटा दिया है. हमें इस पर बात करना चाहिये.”
 

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