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अयोध्या का फैसला अब सुप्रीम कोर्ट में

अयोध्या का फैसला अब सुप्रीम कोर्ट में

लखनऊ. 17 अक्टूबर 2010


अयोध्या मसले को बातचीत से निपटाने की तमाम कोशिशें असफल हो गई हैं और अब ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड और निर्मोही अखाड़े ने इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ बेंच के फैसले को चुनौती देने का फैसला किया है.

अयोध्या


लॉ बोर्ड की वर्किग कमेटी की बैठक में यह सवाल मजबूती से उठा कि हाईकोर्ट का फैसला साक्ष्यों पर नहीं, बल्कि मान्यताओं पर आधारित है. कमेटी ने कहा कि इस तरह मान्यताओं पर आधारित फैसले को स्वीकार नहीं किया जा सकता. सुन्नी वक्फ बोर्ड के वकील जफरयाब जिलानी ने कहा कि विवादास्पद जमीन पर हम दावा नहीं छोड़ेंगे.

बोर्ड के अनुसार ‘यह मुसलमानों का अधिकार है और दायित्व भी कि के वे फैसले को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती देकर जजमेंट के जरिये संविधान और न्याय के सिद्धांतों के खिलाफ हुई विसंगतियाँ दूर कराएं.’ बोर्ड की तरफ से कहा गया कि अगर कोई ठोस प्रस्ताव आता है तो बोर्ड बातचीत के लिए तैयार है बशर्ते कि वह प्रस्ताव संविधान, शरियत और मुस्लिम समुदाय के सम्मान के दायरे में हो. बोर्ड ने कहा कि शरियत के अनुसार मस्जिद की जगह पर लेनदेन से कोई समझौता नही हो सकता.

दूसरी ओर अदालत के फैसले से नाराज निर्मोही अखाड़े के महंत भास्कर दास ने भी फैसले के खिलाफ अपील दायर करने का ऐलान किया है. लगातार सुलह की बात करने वाले महंत भास्कर दास ने कहा कि, ‘मुस्लिम यदि पंचकोसी परिक्रमा की परिधि से बाहर मस्जिद बनाना चाहते हैं तो हम जमीन देने को तैयार हैं, लेकिन हम रामजन्मभूमि पर मस्जिद किसी कीमत पर स्वीकार नहीं करेंगे.’

उन्होंने कहा कि फैसले से हमें जमीन का वह हिस्सा मिलेगा, जिस पर हम काबिज हैं. अन्य हिस्से के लिए वाद दायर किया था. इसलिए सुप्रीम कोर्ट के अलावा विकल्प नहीं है.


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