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इसलिये भारत आये हैं ओबामा

इसलिये भारत आये हैं ओबामा

मुंबई. 7 नवंबर 2010


अमरीका के राष्ट्रपति बराक ओबामा का कहना है कि अमरीका को अपनी सेवाएँ और उत्पाद दुनिया भर के बाज़ारों के लिए तैयार करने होंगे. खासतौर पर एशियाई बाज़ार. इस तरह हम एक मज़बूत अर्थव्यस्था तैयार करेंगे जिसकी नींव बेहद मज़बूत होगी.

अपनी भारत यात्रा से पहले अमरीकी समाचार पत्र 'न्यूयॉर्क टाइम्स' को दिए अपने एक लेख में ओबामा ने कहा कि अमरीका को अब अपनी अर्थव्यवस्था में सुधार के लिए नई आधारभूमि तैयार करनी है.

इस लेख में उन्होंने कहा है कि अमरीकियों के पास इस बात का हुनर है कि वो ऐसे उत्पादों की खोज करें और उन्हें विकसित करें जो दुनिया भर में बिकते हैं. ये हमारे अर्थतंत्र की बुनियाद है, जो नई आधारभूमि का हिस्सा बनेगी.

ओबामा ने कहा है कि हमारे समय की सबसे बड़ी चुनौती ये देखना है कि अमरीका सभी तरह की नौकरियों और उद्योगों की प्रतिस्पर्धा के लिए भविष्य में खुद को तैयार रख सके. यह एक मुश्किल काम है और संभव है कि आसान रास्ता अपनाने के लिए हम दूसरे देशों से मुकाबला करने कि बजाय अपने बाज़ारों को सीमित कर लें. लेकिन आज के विश्व में यह विकास का रास्ता नहीं.

लेख में ओबामा ने कहा है कि हमें अपनी सेवाएँ और उत्पाद दुनिया भर के बाज़ारों के लिए तैयार करने होंगे. खासतौर पर एशियाई बाज़ार. इस तरह हम एक मज़बूत अर्थव्यस्था तैयार करेंगे जिसकी नींव बेहद मज़बूत होगी.

इधर मुंबई यात्रा पर आये अमरीकी राष्ट्रपति बराक ओबामा ने भारत-अमरीका व्यापार जगत के एक सम्मेलन को संबोधित करते हुये कहा कि भारत दुनिया की सबसे तेज़ी से बढ़ती अर्थव्यवस्थाओं में से एक है और दोनों देशों के बीच व्यापार पाँच साल में दुगना करने का लक्ष्य है. उन्होंने कहा कि भारत में होना मेरे लिए असाधारण सम्मान है. इस अवसर पर ओबामा ने दोनों देशों के बीच दस अरब डॉलर की लागत से बीस समझौतों का ऐलान किया.

उनका कहना था कि वर्ष 2010 में अमरीका और भारत के बीच व्यापारिक संबंधों से परस्पर लाभ हुआ है. यह दोनों के ही हित में रहा. लेकिन दोनों देशों के बीच व्यापार पर्याप्त नहीं है और अभी बहुत कुछ होने की गुंजाइश है.

उन्होंने कहा कि व्यापार के क्षेत्र में भारत अमरीका का 12वें नंबर का भागीदार है जबकि उसे बहुत आगे होना चाहिए. उन्होंने दोनों देशों के बीच दस अरब डॉलर की लागत से बीस समझौतों का ऐलान किया.


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