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एक युग का अवसान है सिद्धार्थ शंकर रे का निधन

एक युग का अवसान है सिद्धार्थ शंकर रे का निधन

कोलकाता. 7 नवंबर 2010


पश्चिम बंगाल के पूर्व मुख्यमंत्री सिद्धार्थ शंकर रे के निधन के साथ ही एक युग का अंत हो गया. रविवार को उनके अंतिम संस्कार की खबर है. इंदिरा गांधी को भारत में आपात काल लगाने की सलाह देने वाले वरिष्ठ कांग्रेसी नेता सिद्धार्थ शंकर रे का लंबी बीमारी के बाद शनिवार को कोलकाता में निधन हो गया था. वे 90 वर्ष के थे.

इंग्लैंड से बैरिस्टरी की पढ़ाई पूरी करके लौटने के बाद बिधान चंद्र रॉय की सरकार में विधानसभा सदस्य बने सिद्धार्थ शंकर रे जल्दी ही बंगाल और देश की राजनीति में महत्वपूर्ण हो गये. वे 1962 से 1971 तक केंद्रीय मंत्रिमंडल में रहे और 1972 में पश्चिम बंगाल के मुख्यमंत्री बने.

राज्यपाल, मुख्यमंत्री, केंद्रीय मंत्री और राजदूत के पद पर रहे सिद्धार्थ शंकर रे देशबंधु चित्तरंजन दास के पोते थे. सिद्धार्थ शंकर रे को बंगाल में नक्सलवाद को हिंसक तरीके से कुचलने और बांग्लादेश को अलग करने की लड़ाई में महत्वपूर्ण भूमिका के लिये जाना जाता था. रे के बारे में कहा जाता है कि उनकी ही सलाह पर तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी ने देश में आपातकाल लगाया था.

कहा जाता है कि नक्सल आंदोलन को हिंसक तरीके से कुचलने और आपातकाल की सलाह देने के कारण ही इसके बाद हुये 1977 के चुनाव में उन्हें हार का सामना करना पड़ा था. इसके बाद सिद्धार्थ शंकर रे सक्रिय राजनीति में लौट कर नहीं आये. हालांकि बाद में उन्हें पंजाब का राज्यपाल और अमरीका का राजदूत भी बनाया गया.


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