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बर्मा में चुनाव पर विवाद जारी

बर्मा में चुनाव पर विवाद जारी

यंगून. 7 नवंबर 2010


बर्मा में 20 वर्षों बाद हुये आम चुनाव को लेकर आलोचना का दौर जारी है. आलोचकों का कहना है कि पिछले 50 वर्षों से चले आ रहे बर्मा के सैन्य शासन में इस तरह का चुनाव महज दिखावा है.

ज्ञात रहे कि 7 नवंबर के मतदान के साथ ही सैन्य शासकों द्वारा देश में लोकतांत्रिक प्रक्रिया शुरु करने का दावा किया जा रहा है लेकिन नोबेल पुरस्कार विजेता आंग सान सू ची का राजनीतिक दल नेशनल लीग फॉर डेमोक्रेसी ने इस चुनाव का बहिष्कार कर रहा है. देश के मुख्य विपक्षी दल के बहिष्कार से इस तरह के दावे को झटका लगा है.

ज्ञात रहे कि पिछले कई सालों से आंग सान सू ची को सैन्य शासकों ने नज़रबंद कर रखा है. पिछली बार 1990 में हुये चुनाव में जब आंग सान सू ची की पार्टी को जीत हासिल हुई तो सेना ने उन्हें नज़रबंद कर लिया और सत्ता देने से इंकार कर दिया.

इसके बाद से ही नेशनल लीग फॉर डेमोक्रेसी के सदस्यों को तरह-तरह से प्रताड़ित करने और उन्हें जेल में डालने का सिलसिला जारी है. ताज़ा चुनाव में भी सेना ने आम लोगों को धमकी दी है कि अगर उनके समर्थक उम्मीदवार को वोट नहीं दिये गये तो लोगों को सरकारी नौकरी से निकाल दिया जायेगा.