पहला पन्ना प्रतिक्रिया   Font Download   हमसे जुड़ें RSS Contact
larger
smaller
reset

इस अंक में

 

रिकॉर्ड फसल लेकिन किसान बेहाल

मधुमेह की महामारी कीटनाशक के कारण?

सूचकांक से कहीं ज्यादा बड़ी है भुखमरी

अंतिम सांसे लेता वामपंथ

प्रतिरोध के वक्ती सवालों से अलग

गरीबी उन्मूलन के नाम पर मज़ाक

जनमत की बात करिये सरकार

नेपाल पर भारत की चुप्पी

लोहिया काल यानी संसद का स्वर्णिम काल

स्मार्ट विलेज कब स्मार्ट बनेंगे

पाकिस्तान आंदोलन पर नई रोशनी

नर्मदा आंदोलन का मतलब

रिकॉर्ड फसल लेकिन किसान बेहाल

मधुमेह की महामारी कीटनाशक के कारण?

अंतिम सांसे लेता वामपंथ

युद्ध के विरुद्ध

किसके साथ किसका विकास

क्या बदल रहा है हिन्दू धर्म का चेहरा?

मोदी, अमेरिका और खेती के सवाल

 
 पहला पन्ना > राजनीति > अर्थ जगत Print | Send to Friend | Share This 

अब नहीं बनेगी चवन्नी

अब नहीं बनेगी चवन्नी

नई दिल्ली. 11 नवंबर 2010


सरकार ने मान लिया है कि 25 पैसे के सिक्के का आज की तारीख में कोई खास महत्व नहीं है. उल्टे उसको बनाने में दुगनी से अधिक रकम खर्च हो जाती है. ऐसे में वित्त मंत्रालय ने 25 पैसे के सिक्के बंद करने का निर्णय लिया है. अगर सब कुछ ठीक-ठाक रहा तो आने वाले दिनों में चवन्नी का सिक्का इतिहास की बात हो सकती है.

रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया का मानना है कि 25 पैसे के सिक्के को बनाने में लगभग 50 पैसे खर्च हो जाते हैं. इस सिक्के को गलाने वाला गिरोह इसे गला कर ज़्यादा पैसे कमाता है, जिससे 25 पैसे के सिक्के की हमेशा किल्लत बनी रहती है. मतलब ये कि इस तरह से 25 पैसे के सिक्कों का लाभ असामाजिक तत्व उठा रहे हैं.

रिजर्व बैंक के तर्कों के बाद वित्त मंत्रालय ने आने वाले दिनों में 25 पैसे के सिक्कों की ढ़लाई नहीं करने का निर्णय लिया है. वित्त मंत्रालय ने इसका प्रस्ताव कैबिनेट को भेज दिया है. उम्मीद की जा रही है कि कैबिनेट की मंजूरी मिल जायेगी. उसके बाद से 25 पैसे के सिक्के खुद ही चलन से बाहर हो जायेंगे.


इस समाचार / लेख पर अपनी प्रतिक्रिया हमें प्रेषित करें

  ई-मेल ई-मेल अन्य विजिटर्स को दिखाई दे । ना दिखाई दे ।
  नाम       स्थान   
  प्रतिक्रिया
   

 
  ▪ हमारे बारे में   ▪ विज्ञापन   |  ▪ उपयोग की शर्तें
2009-10 Raviwar Media Pvt. Ltd., INDIA. feedback@raviwar.com  Powered by Medialab.in