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आंग सान सू ची की रिहाई

आंग सान सू ची की रिहाई

यंगून. 13 नवंबर 2010


नोबल पुरस्कार विजेता और लोकतंत्र समर्थक आंग सान सू ची को लगभग 15 सालों की नजरबंदी के बाद आज बर्मा की सैनिक सरकार ने रिहा कर दिया. 65 वर्षीय सू ची को ऐसे समय में रिहा किया गया है, जब बर्मा में सैन्य समर्थक चुनाव में जीत कर आये हैं. इस चुनाव का सू ची की पार्टी नेशनल लीग फ़ॉर डेमोक्रेसी ने बहिष्कार किया था.

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नज़रबंदी से रिहा होने के बाद सू ची ने अपने घर के बाहर जुटे हजारों समर्थकों को कहा कि सबी लोग एकजुट रहें. उन्होंने कहा- "हमने एक-दूसरे को लंबे समय से नहीं देखा है तो हमें बहुत कुछ कहना-सुनना है. अगर आपको मुझसे कुछ कहना है तो आप कल पार्टी मुख्यालय आइए, तो हम वहाँ बात कर पाएँगे और तब मैं लाउडस्पीकर का भी इस्तेमाल करूँगी."

सू की 19 जून 1945 को रंगून(अब यंगून) में पैदा हुईं. उनकी माता खिन की और पिता जनरल आंग सान ने भी लोकतंत्र बहाली के लिए संघर्ष किया. जनरल सान की 1947 में हत्या कर दी गई. सू की ने नई दिल्ली और लंदन में शिक्षा ली. उन्होंने ब्रिटेन के एक शिक्षाविद माइकल आरिस से ब्रिटेन में ही विवाह किया.

वे अप्रैल 1988 में यंगून लौट गईं. उस समय पूरे देश में सैन्य शासकों के खिलाफ लोकतंत्र समर्थकों का आंदोलन चल रहा था. इसी से प्रेरित होकर उन्होंने राजनीति में प्रवेश किया. उन्होंने नेशनल लीग फॉर डेमोक्रेसी (एनएलडी) का गठन किया. इसके बाद उन्होंने देश में लोकतंत्र की स्थापना के लिए आंदोलन छेड़ दिया. म्यामांर के सैन्य शासन ने उन्हें जुलाई 1989 को देश को खतरे में डालने का आरोप लगाते हुए नजरबंद कर दिया.

उसके बाद हुए आम चुनावों में हालांकि सू की प्रचार नहीं कर सकीं, लेकिन उनकी पार्टी ने 485 में से 392 सीटें जीतीं. ये चुनाव तीस साल के बाद हुए थे. इसके बाद सेना ने सत्ता हस्तांतरण से मना कर दिया. तब से सू की नजरबंद थीं.


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