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मनमोहन सिंह नहीं देंगे इस्तीफा

मनमोहन सिंह नहीं देंगे इस्तीफा

नई दिल्ली. 18 नवंबर 2010


स्पेक्ट्रम घोटाले में उच्चतम न्यायालय द्वारा प्रधानमंत्री से जवाब मांगे जाने के बाद से राजनीतिक हलको में अफवाहें तेज़ होने लगी हैं. आज मनमोहन सिंह के इस्तीफे की अफवाह के बीच पीएम कार्यालय ने कहा कि मनमोहन सिंह के इस्तीफा की खबर अफवाह है. कई नेताओं द्वारा काफी पहले स्पेक्ट्रम घोटाले के मुद्दे पर चिट्ठी लिखे जाने के बाद भी प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह की चुप्पी को लेकर उच्चतम न्यायालय ने मनमोहन सिंह से जवाब तलब किया है.

इस खबर के बाद से सियासी गलियारों में अफवाहें फैलने लगीं. हालत ये हुयी कि बुधवार को प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह के इस्तीफे की तैयारी की खबर आने लगी. अंत में प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह के कार्यालय को इस खबर का खंडन करना पड़ा. हालांकि इस बीच कई नेताओं ने दावा किया है कि उन्होंने मनमोहन सिंह को इस घोटाले को ले कर कई-कई पत्र लिखे लेकिन मनमोहन सिंह इस मामले में मौनी बाबा बने रहे.

खबरों के अनुसार माकपा सांसद सीताराम येचुरी ने 2008 में ही प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह को इस घोटाले की जानकारी दी थी. 2जी स्पेक्ट्रम आवंटन में गड़बड़ी को लेकर येचुरी ने पहली बार फरवरी 2008 में प्रधानमंत्री को चिट्ठी लिखी थी. उन्होंने स्पेक्ट्रम के मनमाना तरीके से हो रहे आवंटन की जानकारी दी थी.

इस पत्र के बाद नवंबर 2008 में माकपा ने पीएम को चिट्ठी लिखकर आगाह किया कि स्पेक्ट्रम आवंटन में ‘पहले आओ, पहले पाओ’ की नीति का पालन नहीं किया जा रहा है. पत्र में इस ओर भी इशारा किया गया था कि स्पेक्ट्रम आवंटन से कुछ हफ्ते पहले ही कई ऐसी कंपनियों के नाम सामने आए हैं, जिनका कोई वजूद ही नहीं है. माकपा पोलित ब्यूरो सदस्य ने मई 2010 में पीएम को तीसरा पत्र लिखा जिसमें स्पेक्ट्रम आवंटन में गड़बड़ी को लेकर तत्कालीन दूरसंचार मंत्री ए राजा पर अंगुली उठाई गई थी.

राज्यसभा सदस्य राजीव चंद्रशेखर ने भी स्पेक्ट्रम आवंटन मामले को लेकर प्रधानमंत्री को चार पत्र लिखे थे. नवंबर 2007 में इनकी पहली चिट्ठी में सवाल किया गया कि स्पेक्ट्रम का आवंटन वर्ष 2001 की दरों पर क्यों किया जा रहा है.

येचुरी की पार्टी माकपा ने बुधवार को बयान जारी कर पूछा है कि जब 2008 से ही स्पेक्ट्रम आवंटन में हुए घपले की जांच की मांग की जा रही है तो प्रधानमंत्री इस पर खामोश क्यों हैं. पार्टी ने प्रधानमंत्री से इस मामले में संसद में बयान देने की मांग की है.

वहीं भाजपा नेता लालकृष्ण आडवाणी ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट की टिप्पणी गंभीर है और उनके 60 साल के राजनीतिक जीवन में कभी भी कोर्ट ने प्रधानमंत्री के खिलाफ इतनी कड़ी टिप्पणी नहीं की. विपक्ष संसद में प्रधानमंत्री के बयान की मांग करते हुए पिछले कई दिनों से संसद की कार्यवाही नहीं चलने दे रहा है, पर सरकार जबरन अड़ी हुई है.

ज्ञात रहे कि कांग्रेस गठबंधन के सहयोगी दल डीएमके के कोटे से मंत्री बनाये गये ए राजा पर आरोप है कि इस मंत्री ने वर्ष 2008 में 2जी स्पेक्ट्रम का आवंटन बाजार से सस्ते दर पर किया, जिससे सरकार को एक लाख 76 हजार करोड़ रूपए का नुकसान हुआ. स्पेक्ट्रम आवंटन में राजा ने वित्त एवं कानून मंत्रालयों और भारतीय दूरसंचार नियामक प्राधिकरण ट्राई के सलाहों की भी अनदेखी की. इसके बाद राजा को मंत्रीमंडल से विदा कर दिया गया था.


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