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बिहार में कहीं उदासी, कहीं उत्साह

बिहार में कहीं उदासी, कहीं उत्साह

पटना. 24 नवंबर 2010


बिहार विधानसभा चुनाव परिणाम में भाजपा-जदयू गठबंधन को भारी बहुमत मिलने से जहां इन दोनों पार्टियों के नेता उत्साह भरे हुये हैं, वहीं कांग्रेस ने हार स्वीकार करते हुये कहा है कि पार्टी नई शुरुवात करेगी. जनता दल और लोजपा के नेताओं ने इस परिणाम पर चुप्पी साध ली है.

कांग्रेस नेता सेनिया गांधी ने अपनी पराजय तो स्वीकार करते हुये कहा कि बिहार में पार्टी को शून्य से शुरुआत करनी होगी और हमारी योजना यही करने की है. पार्टी के बिहार प्रभारी मुकुल वासनिक ने हार की जिम्मेवारी स्वीकारते हुये कहा कि पार्टी ने शुरुवात की है, इसके परिणाम बेहतर आयेंगे.

मुकुल वासनिक ने राहुल गांधी का जादू नहीं चलने के मुद्दे पर कहा कि राहुल के सभी चुनावी सभाओं में काफ़ी भीड़ उमड़ती रही. वे जनसभाओं में बेहद अच्छा बोले और निश्चित रूप से कार्यकर्ताओं में उन्होंने जोश भरा. लेकिन जहाँ तक चुनावी परिणाम का सवाल है, ये अलग मुद्दा हैं. इनका विश्लेषण अलग से किया जाएगा.

दूसरी ओर अपनी पार्टी की जीत से भारी उत्साहित भाजपा के अध्यक्ष नितिन गडकरी ने संवाददाताओं से बातचीत करते हुए कहा कि उन्हें इस तरह के प्रदर्शन की उम्मीद नहीं थी. उन्होंने कहा कि हमें अपेक्षा से बड़ी सफलता मिली है. चुनाव परिणामों से स्पष्ट है कि अब जातिवाद की राजनीति नहीं चलेगी.

भाजपा नेता सुषमा स्वराज ने कहा कि यह एक अभूतपूर्व जीत है. उम्मीद है कि देश बिहार का अनुसरण करेगा. चुनाव परिणाम ने साबित किया है कि जो सरकार विकास का काम करेगी, वही जीतेगी. उन्होंने विकास को सबसे बड़ा मुद्दा बताते हुये कहा कि इस चुनाव की सबसे बड़ी उपलब्धि है कि एनडीए ने बिहार जैसे राज्य में विकास की भूख जगाने का काम किया है और ये भूख पूरे देश में जगेगी.

भाजपा के ही अरुण जेटली ने संवाददाताओं से बातचीत करते हुए कहा कि बिहार की जनता ने प्रतिभाशाली नेतृत्व के सामने वंशवाद की राजनीति को ठुकरा दिया है.

जनता दल युनाइटेड के नेता शरद यादव ने कहा कि हम ऐसे ही परिणाम की उम्मीद में थे और सामाजिक आर्थिक विषमता के लोहिया के मुद्दे पर हमने चुनाव लड़ा था, जिस पर जनता ने भी अपनी मुहर लगा दी.