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अरुंधति राय के खिलाफ देशद्रोह का मामला

अरुंधति राय के खिलाफ देशद्रोह का मामला

नई दिल्ली. 28 नवंबर 2010


दिल्ली की पटियाला हाउस कोर्ट ने हुर्रियत नेता सैयद अली शाह गिलानी और लेखिका अरूंधति राय समेत पांच लोगों के खिलाफ देशद्रोह का मुकदमा दर्ज करने के आदेश दिए हैं. इन पर भारत विरोधी बयान देने का आरोप है.

मेट्रोपोलिटन मजिस्ट्रेट नविता कुमारी बाघा ने कहा, ‘दिल्ली पुलिस को भारतीय दंड संहिता की प्रासंगिक धाराओं के तहत प्राथमिकी दर्ज करने और छह जनवरी 2011 को मामले की अगली सुनवाई के दौरान इस संबंध में रिपोर्ट दाखिल करने का निर्देश दिया जाता है.’

अदालत ने दिल्ली पुलिस द्वारा सौंपी गई स्थिति रिपोर्ट को खारिज कर दिया जिसमें कहा गया था कि गिलानी और अन्य के खिलाफ राजद्रोह का कोई अपराध नहीं बनता. अदालत ने कहा कि प्रथम दृष्टया आरोपियों के खिलाफ अकाट्य सबूत हैं और उसने पुलिस से आरोपों की और जांच करने और अनुपालन रिपोर्ट दायर करने को कहा.

अदालत ने इससे पहले राय और गिलानी के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज करने की मांग करने वाली सुशील पंडित की 28 अक्तूबर की शिकायत पर उचित स्थिति रिपोर्ट दायर करने में विफल रहने के लिए पुलिस की खिंचाई की थी. गिलानी और राय की अतिरिक्त शिकायत में पांच अन्य के खिलाफ भी अभियोग चलाने की मांग की गई है. इनमें दिल्ली विश्वविद्यालय के प्रोफेसर एस ए आर गिलानी, जम्मू कश्मीर विश्वविद्यालय के प्रोफेसर शेख शौकत हुसैन भी शामिल हैं.

शिकायत के अनुसार आरोपियों ने यह बयान 24 अक्तूबर में ‘आजादी-द ओनली वे’ विषय पर आयोजित सम्मेलन में दिया था. हुर्रियत नेता गिलानी के साथ मंच पर राय और माओवादी समर्थक नेता वारवरा राव भी थे. इसमें गिलानी और राय ने कहा था कि कश्मीर भारत का अभिन्न अंग नहीं है.

दिल्ली पुलिस को इस मामले में 6 जनवरी 2011 तक अदालत में रिपोर्ट देनी है.

इधर अदालत के इस निर्देश पर प्रतिक्रिया देते हुये अरुंधति राय ने कहा कि जो बात उन्होंने कही है, इससे पहले जवाहरलाल नेहरु समेत कई नेताओं ने इसे कहा है. उन्होंने कहा कि मुझ पर मुकदमा दायर करने से पहले जवाहरलाल नेहरु के खिलाफ मामला दर्ज किया जाना चाहिये.


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