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एफआईआर वेबसाईट पर डालें- दिल्ली हाईकोर्ट

एफआईआर वेबसाईट पर डालें-दिल्ली हाईकोर्ट

नई दिल्ली. 7 दिसंबर 2010


दिल्ली हाईकोर्ट की एक पीठ ने आरोपियों के मूल अधिकार व पारदर्शिता के तहत दिल्ली पुलिस को निर्देश दिया है कि वह थाने में दर्ज एफआईआर की प्रति 24 घंटे के भीतर आरोपी को उपलब्ध कराएं. पीठ ने यह भी निर्देश दिया कि सिर्फ गंभीर मामलों को छोड़ कर पुलिस एक फरवरी 2011 से सभी एफआईआर की जानकारी वेबसाइट पर डाल कर सार्वजनिक करे. हाईकोर्ट ने इस मामले में अन्य कई निर्देश भी दिए हैं ताकि सीआरपीसी की धारा 207 के तहत कानून का पालन हो सके.

एफआईआर की प्रति मांगने पर भी नहीं दिये जाने संबंधी एक याचिका की सुनवाई करते हुये मुख्य न्यायाधीश दीपक मिश्रा व न्यायमूर्ति मनमोहन की खंडपीठ ने पुलिस द्वारा 24 घंटे के भीतर एफआईआर की प्रति उपलब्ध न कराए जाने को एक गंभीर मामला मानते हुए कहा कि निष्पक्ष जांच किसी भी नागरिक को संविधान की धारा 21 के तहत अधिकार देती है. अदालत ने कहा कि जिस भी व्यक्ति के खिलाफ कोई आपराधिक मामला दर्ज हुआ हो, इसकी पूरी जानकारी पाने का उसको अधिकार है. जिससे भारतीय कानून के तहत वह अपनी आजादी व सुरक्षा को बचाने के लिए जरूरी कानूनी कदम उठा सके. पीठ ने कहा कि आरोपी को सीआरपीसी की धारा 207 के तहत एफआईआर की प्रति पाने का अधिकारी है.

पीठ ने कहा कि एफआईआर की जानकारी 1 फरवरी 2011 से वेबसाइट पर भी डाली जाये. गंभीर मामले में हालांकि एफआईआर को वेबसाइट पर डालने से छूट रहेगी.

पीठ ने कहा कि उनका यह आदेश सिर्फ उस मामलों में लागू नहीं होगा, जहां मामला अत्यधिक गंभीर प्रकृति का है परंतु उक्त एफआईआर की बाबत उसे इलाका मजिस्ट्रेट को जानकारी देना जरूरी है. आदेश में आगे कहा गया कि एफआईआर को सार्वजनिक न करने का निर्णय केवल डिप्टी कमिश्नर के स्तर का अधिकारी ही ले सकेगा परंतु इलाका मजिस्ट्रेट को जानकारी देनी ही पड़ेगी.


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