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तलाक देने का हक पत्नी को नहीं

तलाक देने का हक पत्नी को नहीं

नई दिल्ली. 9 दिसंबर 2010


इस्लाम के मुताबिक, केवल पति को ही तलाक देने का अधिकार है. पत्नी की ओर से दिया गया तलाक मान्य नहीं है. यह बात दारूल उलूम देवबंद की ओर से जारी फतवे में कही गई है.

देवबंद ने ऐसे समय में यह फतवा दिया है, जब कुछ महीने पहले ही इस्लामी दायरे में तलाक को लेकर केरल हाई कोर्ट ने कहा था कि बहुविवाह की स्थिति में कोई पत्नी बिना किसी कानूनी प्रक्रिया में गए, सिर्फ अपने विवेक के आधार पर अपने पति को तलाक दे सकती है. हालांकि इस्लाम में पुरुषों की तरह ही औरतों को भी 'खुला' लेने का हक है, लेकिन इसका फैसला वे अपने विवेक के आधार पर नहीं कर सकतीं. इसके लिए उन्हें न सिर्फ अदालत में यह बताना पड़ता है, बल्कि सबूतों और गवाहों के जरिए साबित भी करना पड़ता है कि अपने पति के साथ रह पाना अब उनके लिए असंभव हो गया है.

देवबंद की वेबसाइट पर तलाक संबंधी फतवों के एक सवाल में पूछा गया था कि पत्नी के तीन बार तलाक कहने पर क्या वह तलाक देने की हकदार है? देवबंद ने जवाब दिया कि इस्लाम के मुताबिक, केवल पति ही तलाक देने का हकदार है, पत्नी नहीं, इसलिए अगर आपकी पत्नी ने तीन बार "तलाक" कहा है, तो भी तलाक नहीं हो सकता.