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कौन जज भ्रष्ट, यह सबको पता है-सुप्रीम कोर्ट

कौन जज भ्रष्ट, यह सबको पता है-सुप्रीम कोर्ट

नई दिल्ली. 10 दिसंबर 2010


उच्चतम न्यायालय ने इलाहाबाद उच्च न्यायालय के बारे में अपनी उस टिप्पणी को वापस लेने से मना कर दिया है, जिसमें उसने कहा था कि इलाहाबाद उच्च न्यायालय में गंदगी मची हुई है और वहां सफाई की ज़रुरत है. कोर्ट ने शुक्रवार को इलाहाबाद उच्च न्यायालय के खिलाफ और कड़ी टिप्पणी की है. हालांकि न्यायालय ने अपने फैसले में यह टिप्पणी ज़रुर जोड़ दी है कि इलाहाबाद हाईकोर्ट में कुछ 'उत्कृष्ट और अच्छे जज' भी हैं.

ज्ञात रहे कि 26 नवंबर को उत्तर प्रदेश के बहराइच जिले में वक्फ की एक ज़मीन के मामले में सुनवाई के दौरान उच्चतम न्यायालय ने कहा था कि इलाहाबाद हाईकोर्ट में कुछ गड़बड़ है और वहां 'अंकल जज' की समस्या और गंभीर हुई है, जिसे रोका जाना जरूरी है. इस टिप्पणी में पीठ ने कहा था कि हाईकोर्ट के जज 'अंकज जज सिंड्रोम' से पीड़ित हैं.

इलाहाबाद उच्च न्यायालय के खिलाफ की गई इस टिप्पणी को हटाने के लिये उच्चतम न्यायालय में याचिका लगाई गई थी. हाईकोर्ट की पूर्ण बेंच के फैसले के बाद वहां के रजिस्ट्रार जनरल की ओर से यह याचिका दायर की गई थी.

इस याचिका में कहा गया था कि अदालत के खिलाफ इस तरह की टिप्पणी से राज्य भर में अदालत की छवी खराब हुई है. टिप्पणी के कारण जजों का काम करना मुश्किल हो गया है. इलाहाबाद हाई कोर्ट ने इस मामले में दायर याचिका में कहा था कि सुप्रीम कोर्ट को हाई कोर्ट संबंधी जो शक्तियां दी गई हैं, वे सिर्फ अपील से संबंधित हैं. शीर्ष अदालत को हाई कोर्ट पर नजर रखने संबंधी अधिकार नहीं हैं.

शुक्रवार को इस अपील पर जब इलाहाबाद उच्च न्यायालय की ओर से अधिवक्ता पीपी राव बहस कर रहे थे तो न्यायमूर्ति मार्कंडेय काटजू ने नाराजगी जाहिर करते हुये कहा कि आप मुझे मत समझाइये, मेरा परिवार सौ साल से इलाहाबाद हाईकोर्ट से जुड़ा हुआ है. क्या आपको लगता है कि मैं उसकी छवि खराब करूंगा. मैं आज जो कुछ भी हूं, वो इलाहाबाद हाईकोर्ट के कारण ही हूं. हर कोई जानता है कि कौन ईमानदार है और कौन भ्रष्ट. जिस दिन मैं रिश्वत लेना शुरू कर दूंगा, उसी दिन सबको पता चल जाएगा.

न्यायमूर्ति काटजू ने कहा कि देश की जनता मूर्ख नहीं है. वो सब जानती है कि कौन जज भ्रष्ट है, लेकिन लोग बोलने से डरते हैं क्योंकि अदालत की अवमानना का डर रहता है.

इलाहाबाद हाईकोर्ट की ओर से सुप्रीम कोर्ट में पेश हुए वरिष्ठ वकील पीपी राव ने जब कहा कि 'उत्कृष्ट और अच्छे जज' की टिप्पणी के बाद भी जजों की विश्वसनीयता पर प्रश्न चिन्ह बचा रह जाता है, पीठ ने कहा, "यह प्रतिक्रिया व्यक्त करने का नहीं बल्कि आत्मनिरीक्षण करने का समय है.


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