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देशद्रोह के आरोप में डॉ बिनायक सेन को उम्रकैद

देशद्रोह के आरोप में डॉ बिनायक सेन को उम्रकैद

रायपुर. 24 दिसंबर 2010


छत्तीसगढ़ के रायपुर में एक अदालत ने मानवाधिकार संगठन पीपुल्स यूनियन फॉर सिविल लिबर्टीज़ (पीयूसीएल) के उपाध्यक्ष डॉ. बिनायक सेन को देशद्रोह के आरोप में उम्रकैद की सज़ा सुनाई है. सेन के अलावा नक्सल विचारक नारायण सान्याल और कारोबारी पीयूष गुहा को भी अदालत ने राजद्रोह का दोषी माना और उन्हें भी उम्रकैद की सज़ा सुना दी.

शुकवार को रायपुर में अतिरिक्त ज़िला एवं सत्र न्यायाधीश न्यायमूर्ति बीपी वर्मा ने इन तीनों को भारतीय दंड विधान की धारा 124 (देशद्रोह) और 120 बी (षडयंत्र) और छत्तीसगढ़ के जनसुरक्षा अधिनियम की विभिन्न धाराओं के तहत यह सज़ा सुनाई. इसके अलावा उन्हें ग़ैरक़ानूनी गतिविधि निरोधक अधिनियम की विभिन्न धाराओं के तहत भी सज़ा सुनाई गई. यह सारी सज़ाएँ एक साथ चलेंगीं.

डॉ बिनायक सेन को मई 2007 में बिलासपुर से गिरफ्तार किया गया था. उस समय उन पर आरोप लगे थे कि वब नक्सल विचारक नारायण सान्याल का पत्र भूमिगत नक्सली नेताओं तक पहुँचाने जा रहे थे. इसके बाद वे दो वर्षों तक जेल में रहे और आखिर में मई 2009 में उन्हें सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर जमानत मिल सकी थी.

डॉ सेन को दोषी करार दिए जाने के बाद उनकी पत्नी एवं वरिष्ठ सामाजिक कार्यकर्ता एलिना सेन ने इस फैसले पर निराशा जताई. उन्होंने कहा कि एक तरफ देश में गैंगस्टर खुले घूमते रहते हैं वहीं दूसरी तरह 30 सालों तक लगातार आदिवासियों की सेवा करने वाले व्यक्ति को उम्रकैद दे दी जाती है. इस फैसले के खिलाफ कई अन्य सामाजिक कार्यकर्ताओं और संगठनों ने भी अपनी असहमति जताई है.
 

 

इस समाचार / लेख पर पाठकों की प्रतिक्रियाएँ

 
 

ankur tiwari [] janjgir - 2015-05-22 10:23:15

 
  इस मामले से जुड़ी अगर और कोई अपडेट हो तो मेरे ई मेल आईडी पर जानकारी देने का कष्ट करें...आदरणीय सर 
   
 

M5user [m5@medialab.co.in] Bhilai -

 
  डॉ बिनायक सेन को मई 2007 में बिलासपुर से गिरफ्तार किया गया था. उस समय उन पर आरोप लगे थे कि वब नक्सल विचारक नारायण सान्याल का पत्र भूमिगत नक्सली नेताओं तक पहुँचाने जा रहे थे. इसके बाद वे दो वर्षों तक जेल में रहे और आखिर में मई 2009 में उन्हें सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर जमानत मिल सकी थी.
 
   
 

M5user [m5@medialab.co.in] Bhilai -

 
  डॉ बिनायक सेन को मई 2007 में बिलासपुर से गिरफ्तार किया गया था. उस समय उन पर आरोप लगे थे कि वब नक्सल विचारक नारायण सान्याल का पत्र भूमिगत नक्सली नेताओं तक पहुँचाने जा रहे थे. इसके बाद वे दो वर्षों तक जेल में रहे और आखिर में मई 2009 में उन्हें सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर जमानत मिल सकी थी.
 
   
 

bhagatsingh [] raippur -

 
  bus nt ki binaya par deshdroh ki dhara ko adalat ne
ne kharij kar diya tha.lekin jiyadatar mediya ne yahi likha ki nayak ko deshdrohi ka apradh pramanit hua hain.vastav me bat ye hain ki rajdroh aur desh droh ko gadmae kar diya gaya hain.
please aap to deshdroh shabd ka istemal na karen.
 
   
 

संजीव कुमार त्रिनेत्र [] जबलपुर -

 
  यह दुखद है कि हमारी व्यवस्था में विरोध के लिये जगह नहीं बची है. 
   
 

Prabhakar [rakesh1936@gmail.com] Agra -

 
  पत्र पहुँचाने के आरोप में उम्रक़ैद की सज़ा! क्या यही मानवीयता,गाँधीवाद और विश्व के सबसे बडे लोकतंत्र होने का ढोल पीटने वाला देश है; जहाँ बडे-बडे गैंगस्टर और गुंडे माननीय बनकर क़ानून बनाते हैं और चोर, हत्यारे तथा डकैत रीयल्टी शो में टीवी पर चेहरे चमकाते हैं? हास्यास्पद क़ानून और लोकतंत्र को शर्मसार कर देने वाले फ़ैसले। नाइजीरिआ के केन सारो वीवा याद हैं आपको? शुक्र मनाइये कि बिनायक सेन को फांसी की सज़ा नहीं सुनाई गयी। और हाँ;अदालत के फ़ैसले का सम्मान करने वाली क्या यह वही कांग्रेस है जो इन्दिरा गान्धी के चुनाव के ख़िलाफ़ अदालत के फ़ैसले पर इमर्जेंसी लगा देती है, या फिर शाहबानो केस में क़ानून ही बदलवा देती है? शर्म इनको मगर नहीं आती।  
   
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