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बालाकृष्णन के ख़िलाफ़ जनहित याचिका

बालाकृष्णन के ख़िलाफ़ जनहित याचिका

नई दिल्ली. 5 जनवरी 2011
 

सुप्रीम कोर्ट के पूर्व मुख्य न्यायाधीश केजी बालाकृष्णन के खिलाफ एक जनहित याचिका दायर करके उनके व उनके परिजनों की संपत्ति की जांच करने की मांग की गई है. बालाकृष्णन अभी मानवाधिकार आयोग के अध्यक्ष हैं.

सुप्रीम कोर्ट में दिल्ली के एक वकील मनोहर लाल शर्मा द्वारा दायर इस याचिका में कहा गया है कि जब बालाकृष्णन सर्वोच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश थे तब उनके दामाद श्रीनिजन ने अपनी आय से अधिक संपत्ति अर्जित की. वर्ष 2006 में जब श्रीनिजन ने विधानसभा का चुनाव लड़ा था तब उन्होंने अपनी कुल संपत्ति 25 हज़ार रुपए बताई थी लेकिन जब बालाकृष्णन मुख्य न्यायाधीश थे तो उन्होंने सात करोड़ रुपए की संपत्तियाँ ख़रीदीं.

याचिका में परिजनों की आय से अधिक संपत्ति के विवाद की न्यायिक जाँच और केजी बालाकृष्णन को मानवाधिकार आयोग के अध्यक्ष पद से हटाने की मांग की गई है.

ज्ञात रहे कि इससे पहले सर्वोच्च न्यायालय के पूर्व न्यायाधीश वीआर कृष्णा अय्यर ने भ्रष्टाचार के मामले की न्यायिक जांच की मांग की थी.

उधर केरल के मुख्यमंत्री वीएस अच्युतानंदन ने इन आरोपों को गंभीर बताया और कहा कि इसकी जाँच जल्द से जल्द होनी चाहिए. उन्होंने कहा कि गृहमंत्री को श्रीनिजन के ख़िलाफ़ मिली शिक़ायतें सौंप दी है और उन्हें इसकी जाँच करने को कहा है. मामले को अविलंब देखा जाना चाहिए और इसे गंभीरता से लिया जाना चाहिए.

दूसरी ओर इस विवाद के बाद जब कांग्रेस पार्टी ने श्रीनिजन को कारण बताओ नोटिस जारी किया तो श्रीनिजन ने कांग्रेस पार्टी के उपाध्यक्ष पद से इस्तीफा दे दिया है. केरल सरकार के सतर्कता विभाग की तरफ से भी जाँच शुरु कर दी है.

केरल के एडवोकेट जनरल ने केजी बालाकृष्णन के भाई के जी भास्करण को स्पेशल गवर्नर्मेंट प्लीडर के पद से इस्तीफ़ा देने को कहा है, जहां उन पर भी भ्रष्टाचार के आरोप लगाये गये हैं. उन्होंने सरकार के समक्ष अपनी संपत्ति छुपाकर दस्तावेज जमा किये थे.


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