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विदेशी बैंक खाताधारियों के नाम नहीं होंगे सार्वजनिक

विदेशी बैंक खाताधारियों के नाम नहीं होंगे सार्वजनिक

नई दिल्ली. 25 जनवरी 2011


भारत के वित्त मंत्री प्रणव मुखर्जी ने एक बार फिर साफ किया है कि सरकार देश का धन लूट कर या चोरी कर विदेशी बैंकों में जमा करने वाले लूटेरों का नाम सार्वजनिक नहीं करेगी. हालांकि उन्होंने यह जरुर कहा है कि देश का आयकर विभाग उनसे आयकर जमा करने के लिये दबाव बना सकता है. प्रणव मुखर्जी का बयान ऐसे वक्त में आया है जब उच्चतम न्यायालय ने सरकार को फटकार लगाई है कि विदेशी बैंकों में पैसा जमा करने का मामला केवल आयकर का मामला नहीं है, यह देश का धन लूटने की तरह है.

पत्रकारों से बातचीत में प्रणव मुखर्जी ने कहा कि पहले इस मुद्दे को ध्यान से समझना चाहिए. विदेशों से मिले नामों का खुलासा किया जा सकता है, पर यह तभी जबकि आयकर विभाग इन व्यक्ति‍यों के खिलाफ़ जांच पूरी कर उनके खिलाफ़ मामला दायर कर चुका हो. उन्होंने कहा कि जब तक कानूनी रूप रेखा तय न हो तब तक ऐसी जानकारी को सार्वजनिक नहीं किया जा सकता है. कोई भी संप्रभु देश कानूनी सरंचना के अभाव में जानकारी को नहीं बांटेगा. उन्होंने कहा कि डबल टैक्सेशन समझौता और एक्सचेंज ऑफ टैक्सेशन इन्फोर्मेशन एग्रीमेंट ही वो रास्ते हैं जिसके तहत अन्य देशों से जानकारी हासिल की जा सकती है.

उन्होंने कहा कि जो जानकारी हम हासिल करेंगे वह गोपनीयता की शर्तों के दायरे में आती है. आज अगर हम लोगों के नाम सार्वजनिक करते हैं तो फिर हमें जानकारी मिलनी बंद हो जाएंगी. हम पर अंतरराष्ट्रीय समझौतों का पालन न करने का आरोप लगेगा.

प्रणव मुखर्जी ने कहा कि अगर आयकर विभाग टैक्स चोरों के खिलाफ केस दर्ज करने में कामयाब होती है तो फिर लोगों को उनके नाम पता चल जाएंगे. मेरे पास भी अधिकार नहीं है कि मुझे पता चल सके कि किसने काला धन बैंकों में छिपा कर रखा है. आयकर अधिकारियों के पास कानूनी ताकत है जिसके तहत वह काम करते हैं लेकिन मंत्रालय के अधिकार क्षेत्र में यह नहीं आता.


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