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विनायक सेन की जमानत पर सुनवाई अब 9 फरवरी को

विनायक सेन की जमानत पर सुनवाई अब 9 फरवरी को

बिलासपुर. 25 जनवरी 2011


देशद्रोह के आरोप में जेल में बंद विनायक सेन की जमानत याचिका पर सुनवाई 9 फरवरी तक के लिये टाल दी गई है. छत्तीसगढ़ उच्च न्यायालय ने मंगलवार को सुनवाई के बाद सरकारी वकील की बहस के लिये 9 फरवरी की तारीख तय की है.

ज्ञात रहे कि रायपुर की एक अदालत ने डॉक्टर बिनायक सेन को राजद्रोह और साजिश रचने के लिए दोषी ठहराते हुए उन्हें आजीवन कारावास की सजा सुनाई है. सेन पर नक्सलियों से सम्बंध रखने का आरोप रहा है. सेन पर नक्सलियों को मदद पहुंचाने का आरोप है. अदालत ने डॉक्टर बिनायक सेन को नक्सलियों को मदद करने और देश के खिलाफ युद्ध छेड़ने का दोषी पाया है.

नक्सलियों की मदद करने के आरोप में डॉक्टर विनायक सेन सहित नारायण सान्याल और पियूष गुहा को भी दोषी करार दिया गया था

सोमवार को छत्तीसगढ़ के उच्च न्यायालय में उनकी जमानत याचिका पर प्रख्यात वकील राम जेठमलानी ने पैरवी की थी. मंगलवार को अधिवक्ता सुरेंद्र सिंह ने विनायक सेन की जमानत याचिका पर पैरवी जारी रखी. इसके बाद सरकारी वकील को अपना पक्ष रखने के लिये 9 फरवरी का समय दिया गया है.

इधर इसी मामले में कुछ समय पूर्व नक्सली हमले में छत्तीसगढ़ के राजनांदगांव में मारे गये एस पी विनोद चौबे की विधवा रंजना चौबे और मारे गये पुलिसकर्मी संजय यादव की विधवा लता यादव की ओर से एक अधिवक्ता ने हस्तक्षेप याचिका दायर करने की अपील करते हुये विनायक सेन की जमानत का विरोध किया. उन्होंने विनायक सेन के खिलाफ कुछ अन्य सबूत भी पेश करने की बात कही. अदालत ने उनके आवेदन को स्वीकारते हुये कहा कि वे अपना पक्ष राज्य सरकार और महाधिवक्ता के समक्ष रख सकते हैं.


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