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राष्ट्रपति ने किया भ्रष्टाचार से लड़ने का आह्वान

राष्ट्रपति ने किया भ्रष्टाचार से लड़ने का आह्वान

नई दिल्ली. 25 जनवरी 2011


भारत की राष्ट्रपति प्रतिभा पाटिल ने कहा है कि भ्रष्टाचार देश में विकास और सुशासन के लिये शत्रु की तरह है. उन्होंने सरकार को इससे और प्रभावी तरीके से निपटने की जरुरत पर बल दिया है. गणतंत्र दिवास की पूर्व संध्या पर राष्ट्र के नाम संदेश में उन्होंने कहा कि सरकार मं और पारदर्शिता लाने की जरुरत है.

राष्ट्रपति ने कहा कि भ्रष्टाचार विकास तथा सुशासन का शत्रु है. इसमें फंसे रहने की बजाय यह जरूरी है कि हम इससे ऊपर उठें और भ्रष्टाचार से और अधिक प्रभावी ढंग से निपटने के लिए प्रणाली में बदलाव लाने पर गंभीरता से विचार करें.

भ्रष्टाचार के मुद्दों पर संसद का शीतकालीन सत्र हंगामे की भेंट चढ़ने के परिप्रेक्ष्य में प्रतिभा पाटिल ने विपक्ष और सत्ता पक्ष से कहा कि संसद के सफल संचालन की दोनों की संयुक्त जिम्मेदारी है जिसे वे निभाएं अन्यथा लोकतांत्रिक संस्थाओं पर जनता के भरोसे पर असर पड़ सकता है.

संसद में छाये गतिरोध के संदर्भ में राष्ट्रपति ने कहा कि इसका (संसद का) सफलतापूर्वक संचालन सरकार और विपक्ष दोनों ही पक्षों की संयुक्त जिम्मेदारी है. यह बहुत ही जरूरी है कि सभा की मर्यादा तथा गरिमा हर समय बनाए रखी जाए.

उन्होंने कहा कि जनता के बीच संसद की छवि एक ऐसी संस्था की होनी चाहिए, जहां रचनात्मक सहयोग की भावना के साथ मुद्दों का समाधान खोजने के लिए कार्यवाहियां, चर्चा तथा विचार विमर्श होते रहें. यदि ऐसा नहीं होता तो लोकतांत्रिक संस्थाओं के प्रति जनता के भरोसे पर असर पड़ सकता है और हताशा की भावना पैदा हो सकती है जिसे किसी भी स्वस्थ लोकतंत्र में स्वीकार नहीं किया जा सकता क्योंकि इससे लोकतांत्रिक संस्थाएं असफल होती हैं.

प्रतिभा पाटिल ने कहा कि लोकतांत्रिक संस्थाओं में भागीदारी के बीच विचार विमर्श, लोकतांत्रिक प्रक्रिया का अभिन्न हिस्सा है. उन्होंने कहा कि हमें न केवल लोकतांत्रिक संस्थाओं और इसकी प्रक्रियाओं को मजबूती देनी होगी बल्कि जाने अनजाने में किए गए ऐसे किसी भी कार्य से बचना होगा, जिससे लोकतंत्र कमजोर पड़ता हो अथवा जो लोकतंत्र के लिए हानिकारक हो.

राष्ट्रपति ने समाज में अपराधीकरण और एक दूसरे के प्रति उदासीनता की भावना के बढ़ने पर भी चिन्ता जताई. उन्होंने कहा कि अब समय आ गया है कि हम अपने सामाजिक परिवेश पर भी बारीकी से नजर डालें. क्या समाज का अपराधीकरण बढ़ रहा है, क्या एक दूसरे के प्रति उदासीनता की भावना में वृद्धि हो रही है? क्या हम इतना भोगवादी, संकुचित तथा बेपरवाह हो गये हैं कि हमें अपने कार्यों से अपने भाइयों, समाज अथवा पर्यावरण पर पड़ने वाले प्रभावों की जरा भी चिन्ता नहीं है.

उन्होंने कहा कि यह अत्यंत ही क्षोभ और चिन्ता का विषय है कि मात्र कुछ पैसों के लिए किसी व्यक्ति की हत्या हो जाए अथवा कोई महिला इसलिए बलात्कार का शिकार हो क्योंकि उसने छेड़छाड़ का विरोध किया था.

बढ़ती महंगाई पर चिन्ता जताते हुए राष्ट्रपति ने कहा कि इस पर नियंत्रण के लिए उचित कार्रवाई करने के साथ खाद्य सुरक्षा की व्यवस्था करनी होगी. उन्होंने कहा कि अब हम वैश्विक वित्तीय संकट से पहले की विकास की गति की ओर वापस लौट रहे हैं और हमें यकीन है कि अगले वर्ष हमारी विकास दर नौ प्रतिशत से अधिक रहेगी. लेकिन बढ़ती महंगाई विशेषकर खाद्य पदार्थों की कीमतें गंभीर चिन्ता का विषय हैं और इसने हमारा ध्यान उचित कार्रवाई करने तथा खाद्य सुरक्षा, कृषि उत्पादन और ग्रामीण विकास के लिए नव अन्वेषी तरीकों की खोज की जरूरत की ओर खींचा है.

खाद्यान्न संकट की ओर ध्यान खींचते हुए राष्ट्रपति ने कहा कि हमें दूसरी हरित क्रान्ति की जरूरत है, जिसमें अधिक से अधिक पैदावार ली जा सके और जिसमें साथ ही ग्रामीण आबादी के लिए आय और रोजगार के अवसर भी पैदा हों. उन्होंने कहा कि पहली हरित क्रान्ति ज्यादातर सिंचित इलाकों तक सीमित थी और अब हमें वर्षा सिंचित इलाकों पर अपना ध्यान केन्द्रित करना होगा और यही दूसरी हरित क्रान्ति का पालना बन सकता है.

कृषि क्षेत्र की खराब हालत पर उन्होंने कहा कि छोटे किसान अब खेती छोड रहे हैं क्योंकि इसमें अब कम आय है तथा खेतिहर मजदूर भी नहीं मिल पा रहे हैं. इस स्थिति से निपटने के लिए उन्होंने कहा कि आधुनिकीकरण तथा यांत्रिक खेती पर ध्यान देना फायदेमंद होगा और इसके लिए कृषि तथा ग्रामीण विकास में किसानों, निजी क्षेत्र तथा सरकार के बीच साझेदारी का मॉडल विकसित करने पर भी विचार करना चाहिए.


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