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अदालत ने माना, गोधरा एक साजिश

अदालत ने माना, गोधरा एक साजिश

अहमदाबाद. 22 फरवरी 2011


गुजरात की एक विशेष अदालत ने गोधरा रेल कांड को साज़िश करार किया है और मामले के अभियुक्तों में से 31 को दोषी पाया है. अदालत ने इस मामले में 63 आरोपियों को बरी करने का आदेश दिया है. बरी होने वालों में मामले के मुख्य आरोपी हुसैन उमर भी शामिल हैं.

इस मुकदमे की सुनवाई अहमदाबाद के सेंट्रल जेल में हुई और फ़ैसला भी वहीं सुनाया गया.

ज्ञात रहे कि 27 फ़रवरी 2002 को साबरमती एक्सप्रेस के एक डब्बे में आग लगने से 59 लोग मारे गये थे. मारे गये लोग अयोध्या में कारसेवा कर के लौट रहे थे. अभियोजन पक्ष के अनुसार साबरमती एक्स्प्रेस के एस-6 डब्बे पर लगभग 1,000 लोगों की भीड़ ने हमला किया था.

घटना में 59 लोगों की मौत के बाद गुजरात में भारी सांप्रदायिक दंगे हुए थे.

भारतीय जनता पार्टी के प्रवक्ता प्रकाश जावड़ेकर ने कहा है कि अदालत का फ़ैसला ये दिखाता है कि जो हम कह रहे थे, वो सही था. भाजपा कहती रही है कि साबरमती एक्सप्रेस में आग एक पूर्व नियोजित साज़िश के तहत लगाई गई थी.

गुजरात सरकार के प्रवक्ता जय नारायण व्यास ने कहा है कि अदालत के फ़ैसले से स्पष्ट हो गया है कि कुछ तथाकथित एनजीओ जो सरकार के चेहरे पर कालिख पोतने की कोशिश कर रहे थे, वो ग़लत था.

ज्ञात रहे कि इस मामले में सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर गठित कमेटी ने कई महत्वपूर्ण सवाल खड़े किये थे. रिपोर्टच में कहा गया था कि- “कुल 32 मामलों में आरोपों की जांच की. इसमें हमने पाया कि कई मामलों में राज्य सरकार और राज्य सरकार से जुड़े लोगों, मुख्यमंत्री ने ऐसे काम किए जो ग़लत दिख सकते हैं लेकिन इन मामलों को साबित करने के लिए पर्याप्त चीज़ें नहीं है, जिससे क़ानून के तहत उनके ख़िलाफ़ कार्रवाई की जा सके.''

रिपोर्ट के अनुसार “जब राज्य में सांप्रदायिक हिंसा का माहौल था तब मोदी ने न तो गोधरा के बाद हुए दंगों की कड़ी आलोचना की और न मुस्लिम समुदाय के बेकसूर लोगों के मारे जाने को किसी न किसी तरह उचित ठहराया."

रिपोर्ट में यह बात बहुत साफ की गयी थी कि राज्य के मुख्यमंत्री नरेंद्र मोदी ने किसी कट्टर हिंदू की तरह काम किया और पक्षपात भी किया.


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