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बजट में शिक्षा, स्वास्थ्य और कृषि पर जोर

बजट में शिक्षा, स्वास्थ्य और कृषि पर जोर

नई दिल्ली. 28 फरवरी 2011


वित्त मंत्री प्रणब मुखर्जी ने देश का 80वां आम बजट सोमवार को संसद में पेश किया, जिसमें उन्होंने शिक्षा, स्वास्थ्य, कृषि क्षेत्र पर ज़ोर देने की बात कही है. उन्होंने महंगाई दर पर चिंता व्यक्त करते हुये कहा कि आने वाले दिनों में यह दर कम होगी.

बजट के अनुसार ग़रीबी रेखा से नीचे रहनेवाले लोगों के लिए मिट्टी के तेल और रसोई गैस में मिलनेवाली रियायतें नकद राशि के तौर पर दी जाएगी. वित्त मंत्री ने कहा है कि ग्रामीण इलाकों में घरों के लिए मिलनेवाले कर्ज़ कोष को अब 3,000 करोड़ रूपए तक बढ़ाया जा रहा है. पहले ये 2,000 करोड़ का था.

वित्त मंत्री ने कहा है कि भुखमरी और कुपोषण जैसी समस्याओं से निपटने के लिए एक राष्ट्रीय फ़ूड बिल को संसद में पेश किया जाएगा. सामाजिक क्षेत्र के बजट में 17 प्रतिशत की वृद्धि की जाएगी.

बजट भाषण में प्रणव मुखर्जी ने कहा है कि सकल घरेलू उत्पाद की दर 8.6 प्रतिशत रहने की संभावना है, वहीं कृषि क्षेत्र में वृद्धि की दर 5.4 प्रतिशत होगी. सेवा क्षेत्र में वृद्धि 9.6 प्रतिशत की होगी. उद्दोग क्षेत्र में वृद्धि दर 8.1 प्रतिशत होने की संभावना है.

वित्तमंत्री ने भ्रष्टाचार से लड़ने की जरूरत बताते हुए मिलजुल-कर इस दिशा में काम करने का आहृवान किया. सरकार ने शिक्षा क्षेत्र के लिए भी 52 हज़ार करोड़ रुपये, तथा भारत निर्माण के लिए 58 हज़ार करोड़ रुपये का प्रावधान किया है.

उन्होंने घोषणा की कि समय पर कर्ज चुकाने वाले किसानों को तीन प्रतिशत की छूट मिलेगी, जबकि अब 25 लाख तक के होम लोन सुरक्षित माने जाएंगे, पहले यह सीमा 20 लाख थी. इसके अतिरिक्त सरकार 15 लाख तक होम लोन पर छूट के तौर पर ब्याज पर एक फीसदी सब्सिडी देगी.

बजट के मुख्य प्रावधान
राष्ट्रीय कृषि विकास योजना के बजट को बढ़ाकर 7,860 करोड़ का किया जा रहा है.
राष्ट्रीय कृषि और ग्रामीण विकास बैंक के लिए चरणबद्ध तरीके से 30 अरब रुपए दिए जाएँगे.
नई खाद नीति लाई जाएगी.
ग्रामीण मूलभूत ढांचे के लिए 180 अरब रुपए का प्रावधान रखा गया है.
ग्रामीण इलाकों में घरों के लिए मिलनेवाले कर्ज़ कोष को अब 2000 से 3000 करोड़ रुपए किया गया.
देश के पूर्वी हिस्सों में दूसरी हरित क्रांति के लिए 400 करोड़ की वृद्धि.
ग़रीबी रेखा से नीचे रहने वाले लोगों के लिए मिट्टी के तेल, रसोई गैस में मिलनेवाली रियायतें नकद राशि के तौर पर मिलेंगी.
भुखमरी और कुपोषण जैसी समस्याओं से निपटने के लिए एक राष्ट्रीय फ़ूड बिल को संसद में पेश किया जाएगा.
सामाजिक क्षेत्र के लिए बजट में 17 प्रतिशत की वृद्धि की जाएगी.
आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं का मासिक वेतन 1500 रुपए प्रति माह से 3000 रुपए, सहायकों का वेतन 750 रुपए से बढ़कर 1500 रुपए होगा.
सार्वजनिक क्षेत्र और अन्य स्रोतों से पूँजी विनिवेश किए जाने से लगभग 400 अरब रुपए जुटाए जाएँगे.
एक्साइज़ ड्यूटी को बिना बदलाव के दस प्रतिशत पर ही रखा गया है.
सेबी के साथ पंजीकृत म्यूचुयल फंड अब विदेशी निवेश भी ले पाएँगे.
बैंकिंग क्षेत्र में सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों के लिए 6000 करोड़ रुपए का प्रावधान.
केंद्रीय उत्पाद करों में कोई बदलाव नहीं किया गया है.
सर्विस टैक्स की दर को भी बिना किसी बदलाव के 10 प्रतिशत पर रखा गया है.
लगभग 130 उपभोक्ता सामग्रियों पर 1 प्रतिशत उत्पाद टैक्स लगाया जाएगा.
शिक्षा क्षेत्र के लिए 24 प्रतिशत की वृद्धि, कुल 52057 करोड़ का प्रावधान.
प्रारंभिक शिक्षा के लिए 21 हज़ार करोड़ रुपए रखे गए हैं.
इस साल 20 हज़ार लोगों को प्रशिक्षण, 75 प्रतिशत को नौकरी मिलेगी.
अनुसूचित जाती व जनजाति के नवीं और दसवीं के 40 लाख छात्रों को छात्रवृत्ति.
स्वास्थ्य क्षेत्र में 20 प्रतिशत वृद्धि और कुल 26760 करोड़ रुपए का प्रावधान.
आयकर में छूट की सीमा 1.6 लाख से बढ़ाकर 1.8 लाख की गई.
वरिष्ठ नागरिक कहलाने के लिए आयु सीमा को 65 से घटाकर 60 कर दिया गया है.
वरिष्ठ नागरिकों को छूट की सीमा को 2.40 लाख से बढ़ाकर 2.50 लाख किया गया.
80 साल के वरिष्ठ नागरिकों को आयकर छूट की सीमा पांच लाख रुपये तक की गई है.


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