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अफजल मामले में सरकार पर बरसे जस्टिस ढींगरा

अफजल मामले में सरकार पर बरसे जस्टिस ढींगरा

नई दिल्ली. 2 मार्च 2011


संसद पर हमला बोलने के आरोपी अफजल गुरु को 2002 में फांसी की सजा सुनाने वाले दिल्ली हाईकोर्ट के जस्टिस शिव नारायण ढींगरा ने कहा है कि न्याय मिलने में दो जीवन नहीं लगना चाहिये. न्यायिक सेवा से रिटायरमेंट के अंतिम दिन विदाई के अवसर पर सरकार पर सीधा निशाना साधते हुये शिव नारायण ढींगरा ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट से भी अफजल की सजा की पुष्टि होने के बाद भी सरकार का उसे फांसी पर न लटकाना समझ से परे है.

ज्ञात रहे कि जस्टिस ढ़ींगरा ने साल भर के भीतर ही बतौर स्पेशल जज संसद मामले की सुनवाई की थी और 2002 में अफजल गुरु को फांसी की सजा सुनाई थी. इसके बाद उच्चतम न्यायालय ने 2006 में अफजल गुरु की याचिका ठुकराते हुये फांसी की सजा बरकरार रखी. आरोप है कि सरकार की लापरवाही के कारण अफजल का मामला लटका हुआ है.

अफजल को फांसी की सजा सुनाने वाले जस्टिस शिव नारायण ढींगरा ने अपने कामकाज के अंतिम दिन केंद्र सरकार के कामकाज के तौर-तरीकों पर कई सवाल खड़े किये. उन्होंने कहा कि यह सही है कि अदालतों में लंबित मामलों की संख्या बढ़ी है लेकिन इनको लेकर न्यायपालिका की आलोचना करने वाली सरकार खुद ही कई फाइलें दबाये हुये है. कई दया याचिकायें बरसों से सरकारी फाइलों में बंद पड़ी हुई हैं.

जस्टिस ढींगरा ने कहा, “पीड़ित को कम से कम समय में न्याय दिलाने के लिए बहुत कुछ किया जाना बाकी है. न्याय मिलने में दो जीवन नहीं लगना चाहिए.”

उन्होंने इस बात से भी असहमति जताई कि भारतीय न्याय व्यवस्था दुनिया में सर्वश्रेष्ठ है. उन्होंने कहा कि भारतीय न्यायपालिका में अभी बहुत सुधार की गुंजाइश है लेकिन इसके लिये समाज के सभी वर्ग को आगे आना होगा.


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