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पत्रकार आलोक तोमर नहीं रहे

पत्रकार आलोक तोमर नहीं रहे

नई दिल्ली 20 मार्च 2011.

देश के वरिष्ठ पत्रकार आलोक तोमर का रविवार को निधन हो गया. अपनी तरह की नई भाषा गढ़ने और बेबाक तरीके से लिखने वाले आलोक तोमर लंबे समय से कैंसर से लड़ रहे थे.


चंबल के डाकुओं और कालाहांडी के अकाल पर किताब लिखने वाले आलोक तोमर ने लंबे समय तक जनसत्ता में काम किया. इसके अलावा उन्होंने कई धारावाहिकों और समाचार चैनलों के लिये भी काम किया. इन दिनों वो सीएनईबी चैनल में सलाहकार संपादक के तौर पर काम कर रहे थे.

उनके ब्लॉग पर चस्पा एक टिप्पणी बताती है- “उनके वारे में वहुत सारे किस्से कहे जाते हैं, ज्यादातर सच और मामूली और कुछ कल्पित और खतरनाक. दो बार तिहाड़ जेल और कई बार विदेश हो आए आलोक तोमर ने भारत में काश्मीर से ले कर कालाहांडी के सच बता कर लोगों को स्तब्ध भी किया है तो दिल्ली के एक पुलिस अफसर से पंजा भिडा कर जेल भी गए हैं. वे दाऊद इब्राहीम से भी मिले हैं और रजनीश से भी. वे टी वी, अखबार, और इंटरनेट की पत्रकारिता करते हैं.”

शुरुवाती दिनों से ही रविवार के लिये लिखने वाले आलोक तोमर ने पिछले दिनों अपने कैंसर के अनुभवों को रविवार के पाठकों के साथ साझा किया था. उनको श्रद्धांजलि अर्पित करते हुये हम यहां उनके कुछ आलेख प्रकाशित कर रहे हैं.

मेडिकल आतंकवाद
अतुल्य भारत में अतुल्य भूख की कहानी
ऐसे आतंकवादी बनाती है पुलिस
मरते ग़रीब और मिटती ग़रीबी

 

इस समाचार / लेख पर पाठकों की प्रतिक्रियाएँ

 
 

ravi [ravindra.supekar@rediffmail.com] ludhiana/indore

 
  आलोक जी को बहुत पहले नईदुनिया के कुछ आलेखों के माध्यम से जाना था. अद्भुत लेखन शैली और शब्द सम्पदा के धनी एवं वैचारिक प्रतिभा के पुरोधा को विनम्र श्रद्धांजलि!! एक युग विचारधारा से प्रेरित एवं समाज हित को समर्पित पत्रकारिता के युग का अंत (प्रभाष जी के पश्चात इनका भी जाना.....) 
   
 

yashwant gohil [yash_gohil04@yahoo.co.in] bilaspur

 
  शब्दों को आलोकित करने वाले आलोक जी, आप हमेशा हमारे दिलों में रहेंगे. 
   
 

सुनील शर्मा [sunillsharma@ymail.com] बिलासपुर

 
  आलोक तोमर अब हमारे बीच नहीं है. पहली बार उनके बारे में रविवार के संपादक आलोक प्रकाश पुतुल जी से सुना था, फिर तो अकसर मैं उनके बारे में पूछा करता था. पता नहीं क्यों उनके बारे में जानना,बात करना अच्छा लगता था, मेरे अन्दर एक ऊर्जा का संचार होता था.जब रविवार के लिए उन्होंने कैंसर पर लेख लिखा और मुझे पता चला कि उन्हें कैंसर हो गया है तभी से मुझे लगता था कि पत्रकारिता जगत का यह सूर्य अब अस्ताचल की तरफ बढ़ रहा हैं. उनकी धारदार लेखनी और उनके जीने का अराजक अंदाज अपने आप में किसी साहस से कम नहीं है. उनका यह अंदाज उन्हें जानने वालों को कई बार खलता भी था. मेरा उनसे नाता बतौर एक पाठक ही रहा, कभी उनसे मिलने का अवसर नहीं मिला पर उनके चले जाने के साथ ही अगले वर्ष दिल्ली जाने के दौरान उनसे मिलने की मेरी इच्छा का भी अंत हो गया. अगर उन्होंने अपने सम्मान की रक्षा के लिए एक बड़े पुलिस अफसर से झगडा मोल लिया, जेल गए, जनसत्ता छोड़ने के बाद इंडियन एक्सप्रेस की सीढ़ी पर कदम नहीं रखा. प्रभाष जोशी को ताउम्र अपना गुरु माना, और उनके रिटायर होने पर उन्हें लेने गए. क्या उन्हें भी औरो की तरह चाटुकारिता करनी चाहिए थी पत्रकारिता नहीं. क्या इंसान को अपने ढंग से जीने का भी अधिकार नहीं. इस बात में कोई संदेह नहीं कि उन्होंने अपने जीवन में जो कुछ किया वह केवल वे ही कर सकते थे...कोई और नहीं. उनके लिखे से असहमत हुआ जा सकता था लेकिन उन्हें ख़ारिज करना इतना आसान नहीं था.विवादों से गहरा नाता होने के बाद भी अपने बेबाक लेखन और अलग अंदाज के लिए पत्रकारिता जगत में नई जमीन तैयार करने वाले श्री तोमर को मेरा कोटि-कोटि प्रणाम...श्रध्‍दांजलि. 
   
 

रुद्र अवस्थी [] बिलासपुर

 
  आलोक जी को श्रद्धांजलि.  
   
 

satish jayaswal [satishbilaspur@gmail.com] bilaspur

 
  चंबल के दस्यु की दास्तानों को गंभीर पत्रकारिता का विषय बनाने और उसे पत्रकारिता की भाषा देने का महत्वपूर्ण काम आलोक तोमर ने किया. उनके इस योगदान को हिंदी पत्रकारिता में हमेशा याद किया जायेगा. मैं अपने इस दिवंगत पत्रकार मित्र के प्रति अपनी श्रद्धांजलि अर्पित करता हूं. 
   
 

Deepak [deepakrajim@gmail.com] Abudhabi

 
  आलोक जी को श्रध्‍दांजलि। ईश्वर उनके परिवार को यह दुख झेलने की ताकत दे !! 
   
 

krishna raghava [krishna.raghava@yahoo.com] mumbai

 
  आलोक तोमर जी से मेरा व्यक्तिगत संबंध था. जब वो चंबल के बागियों पर लिख रहे थे, मैं उन पर डाक्यूमेंट्री बना रहा था. जनसत्ता से वो भी जुड़े थे, मैं भी. अच्छे लोगों की जरुरत वहीं शायद ज्यादा रहती है. भगवान उनके परिजनों को धैर्य दे और उनकी आत्मा को शांति दे. 
   
 

Dr.Lal Ratnakar [ratnakarlal@gmail.com] Jaunpur/Ghaziabad

 
  बेबाक और निर्भीक मीडिया कर्मी के रूप में जाने जाने वाले आलोक तोमर के विषय में आपकी सूचना ने तो झकझोर दिया. उनके इस आकस्मिक अवसान पर उनको श्रद्धांजलि अर्पित करता हूँ. 
   
 

अतुल श्रीवास्‍तव [aattuullss@gmail.com/ atulshrivastavaa.blogspot.com] राजनांदगांव, छत्‍तीसगढ

 
  आलोक जी को श्रध्‍दांजलि।  
   
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