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जानकीवल्लभ शास्त्री का निधन

जानकीवल्लभ शास्त्री का निधन

पटना. 8 अप्रैल 2011


हिंदी के वयोवृद्ध कवि जानकीवल्लभ शास्त्री का गुरुवार की रात मुजफ्फरपुर में निधन हो गया. वे पिछले कुछ दिनों से अस्वस्थ चल रहे थे. दो सप्ताह पूर्व ही उन्हें श्रीकृष्ण मेडिकल कॉलेज अस्पताल लाया गया था, जहां से इलाज के बाद वह वापस अपने घर लौट गए थे. उनके परिवार में पत्नी छाया देवी और एक पुत्री हैं.

गया जिले के मैगरा गांव 1916 में जन्मे जानकीवल्लभ शास्त्री ने अपने शुरुवाती दिनों में संस्कृत में कवितायें लिखीं लेकिन बाद में सूर्यकांत त्रिपाठी निराला की प्रेरणा से उन्होंने हिंदी में लिखना शुरु किया. कविता के क्षेत्र में उन्होंने कुछ सीमित प्रयोग भी किए और सन चालीस के दशक में कई छंदबद्ध काव्य-कथाएँ लिखीं. इसके अलावा उन्होंने कई काव्य-नाटकों की रचना की और 'राधा` जैसा श्रेष्ठ महाकाव्य रचा.

पिछले साल 26 जनवरी को सरकार ने उन्हें पद्मश्री से सम्मानित किया किन्तु इसे 'मजाक' कहकर शास्त्रीजी ने अस्वीकार कर दिया था. साहित्य में योगदान के लिये राजेन्द्र शिखर सम्मान, भारत-भारती और शिवपूजन सहाय सम्मान से नवाजा गया था.

उनकी प्रमुख रचनाओं में छाया है, इसके अलावा उन्होंने काव्य संग्रह - बाललता, अंकुर , उन्मेष , रूप-अरूप, तीर-तरंग , शिप्रा, अवन्तिका , मेघगीत, गाथा, प्यासी-पृथ्वी , संगम , उत्पलदल, चन्दन वन, शिशिर किरण, हंस किंकिणी, सुरसरी, गीत, वितान, धूपतरी, बंदी मंदिरम्‌, महाकाव्य – राधा संगीतिका - पाषाणी, तमसा, इरावती नाटक - देवी, ज़िन्दगी, आदमी, नील-झील, उपन्यास - एक किरण : सौ झांइयां, दो तिनकों का घोंसला, अश्वबुद्ध, कालिदास, कहानी संग्रह - कानन, अपर्णा, लीला कमल, सत्यकाम, बांसों का झुरमुट, ललित निबंध - मन की बात, जो न बिक सकीं, संस्मरण -अजन्ता की ओर, निराला के पत्र, स्मृति के वातायन, नाट्य सम्राट पृथ्वीराज कपूर, हंस-बलाका, कर्म क्षेत्रे मरु क्षेत्र, अनकहा निराला, समीक्षा - साहित्य दर्शन, त्रयी, प्राच्य साहित्य, स्थायी भाव और सामयिक साहित्य, चिन्ताधारा, संस्कृत काव्य – काकली, ग़ज़ल संग्रह - सुने कौन नग़मा जैसी किताबें भी लिखीं.


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